यादों के फूल | कॉलेज की वो यादें जो भुलाए नहीं भुलती | Part 2

सुरेश भावना को ढूंढने उसके क्लास कि ओर चला जाता और इंतजार करता

अगले दिन सुरेश कॉलेज गया और अपने क्लास के दोस्तों के साथ पीछे बेंच पर बैठ गया। सुरेश को कहानिया पढना अच्छा लगता था इसलिए वह कहानियो कि एक पत्रिका क्लास में लेकर आता था और जब उसे मौका मिलता तब पत्रिका निकलकर पढ़ने लगता धीरे धीरे यह पत्रिका में कहानिया पढने कि बात उसके बाकि कॉलेज के दोस्तों को भी पता चल गयी। तब सुरेश के दोस्तों ने भी वह पत्रिका देखि तब उन्होंने देखा कि उस पत्रिका में कुछ वयस्क कहानिया(adult story) भी थी।

सुरेश हमेश नयी पत्रिकाए लता रहता था मनोरंजन के लिए और हाथ में हमेशा एक घड़ी पहनता था सुरेश के एक दोस्त को उसकी घड़ी अच्छी लगती थी उसे घड़ी पहनने का शौक था उसने सुरेश से घड़ी मांगी तब सुरेश ने तुरंत निकलकर दे दिया इस तरह सुरेश अपनी चीजो को दोस्तों मे बाटता रहता था जिससे कि उसकी दोस्ती और गहरी होती गयी। लेकिन फिर भी सुरेश ने किसी से अपने दिल कि बात नहीं बताई बस भावना को अपने दिल में छिपाए रखा।

क्लास छुटने के बाद सुरेश भावना को ढूंढने उसके क्लास कि ओर चला जाता और भावना का इंतजार करता लेकिन ऐसे ही एक महिना बीत गया लेकिन उसकी मुलाकात भावना से नहीं हो पायी।

परीक्षा का परिणाम भी आ गया था सुरेश सभी विषयों में पास हो गया था और उसके बाद खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था कॉलेज में जिसमे ११ और १२ के छात्र और छात्राओ ने उसमे हिस्सा लिया था सभी ११ और १२ के छात्र और छात्राए कॉलेज के मैदान में एकत्र हुए तभी सुरेश को अचानक से भावना नज़र आई जिसकी उसने कल्पना भी नहीं कि थी कि उसकी मुलाकात भावना से इस तरह क्लास के बाहर हो पायेगी।

सुरेश अपने आप को रोक नहीं पाया और सीधा भावना कि ओर चल पडा भावना अपनी सहेलियों के साथ मिलकर अपनी सहपाठियो का खेल देख रही थी भावना के साथ उसकी कुछ सहेलिया भी थी। सुरेश भावना के करीब पहुच गया लेकिन अब भी वह भावना से बात नहीं कर पा रहा था क्योकि भावना अनपी सहेलियों के साथ व्यस्त थी सुरेश चुपचाप वहा खड़ा भावना को निहार रहा था तभी भावना कि नज़र सुरेश पर पड़ी भावना भी सुरेश को देखकर मुस्कुराई और सुरेश के पास आई और कुछ बाते सुरु हुई सुरेश ने परीक्षा के परिणाम के बारे में पूछा तब भावना ने भी बताया कि वह भी सभी विषयों में पास हो चुकी है और उसने फिर से सुरेश का सुक्रिय अदा किया कि उसने उसे परीक्षा में मदद किया था।

सुरेश ने भावना से पूछा कि इतने दिन तक वह कहा थी कही नज़र नहीं आई तब भावना ने बताया कि वह अपने नानी के घर गयी थी उसकी नानी बहुत बीमार थी इसलिए वह इतने दिन कॉलेज नहीं आ सकी। भावना ने सुरेश को अपने घर का फोन नंबर दिया सुरेश को और कहा कि जब बात करनी हो तब उसे फोन करे फोन नंबर लिखने के लिए भावना के पास कोई कागज नहीं था इसलिए भावना ने अपना नंबर सुरेश के हाथ पर ही बड़े अक्षरों में लिख दिया था।

सुरेश बहुत ही खुश होकर वहा से चला गया और अपने दोस्तों के साथ खेल में व्यस्त हो गया। सुरेश के दोस्तों कि नज़र सुरेश के हाथो पर पड़ी तब उन्होंने पूछा कि ये किसका नम्बर है तब सुरेश ने किसी को कुछ नहीं बताया बस मुस्कुराने लगा। भावना भी सुरेश को मुड़ मुड़ कर देख रही थी और सुरेश भी भावना को देख रहा था, खेल प्रतियोगिता का समय समाप्त हुआ और सभी अपने घर चले गये।

सुरेश ने भावना का नंबर तो ले लिया था लेकिन कभी उसे फोन करने कि हिम्मत नहीं जुटा पाया कई बार तो सुरेश ने भावना का नंबर डायल भी किया लेकिन जैसे ही फोन कि घंटी बजती तो तुरंत फोन काट देता। क्लास में सुरेश के दोस्त उसे भावना का नाम लेकर चिढ़ाते और उसका मजाक बनाते थे और भावना को सुरेश कि गर्लफ्रेंड बोलते थे। यह सिलसिला यु ही चलता रहा और दो महीने बित गये दूसरी परीक्षा भी निकट आ गयी लेकिन सुरेश भावना से अपने प्यार का इज़हार नहीं सका अपने मन कि बात भावना को बताने कि हिम्मत नहीं कर पाया।

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