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Jimmedari | जिम्मेदारी – छोटी सी उम्र में ही बड़े होनी की

“क्या इतनी गर्मी में आइस क्रीम यु ही जमी रहेगी?”

Jimmedari – संजू आज जब स्कूल से आया तब उसने फिर से घर के दरवाजे पर ताला लगा देखा, तो वह सीढियों पर बैठ गया और अपना बैग वही बगल में रख दिया और अपने माँ के आने तक इंतज़ार करने लगा। उसे भूख लगी थी और थकान भी थी, वह सीढियों पर बैठे बैठे यह सोचने लगा कि काश उसकी माँ भी राहुल कि माँ कि तरह घर पर ही रहती तो कितना अच्छा होता उसे यु इस तरह सीढियों पर बैठ कर इन्तजार न करना पड़ता।

मै स्कूल से आता तो मुझसे स्कूल का हाल चाल पूछती, मेरे लिए गरम गरम खाना बनाती और मुझे प्यार से अपने हाथो से खिलाती। सच मे राहुल का नसीब कितना अच्छा है। यही सब सोचते सोचते न जाने कब संजू कि आँख लग गयी। वह वही सीढियों पर बैठे बैठे ही सो गया। कुछ देर बाद संजू कि माँ आफिस से आई तो संजू को सीढियों पर सोते देखा।

उन्होंने संजू को जगाया, संजू नींद से जागे हुए बोला ओह माँ तुमने कितनी देर लगा दी आने में, मै कब से तुम्हारा इन्तजार कर रहा हूँ। संजू कि माँ को पता था कि संजू को भूख लगी होगी इसलिए उन्होंने जल्दी से घर का दरवाज़ा खोला और संजू को घर के अन्दर ले गयी।

माँ बोली मै अभी खाना गरम करके परोसती हूँ और तुम्हारी थकावट भी दूर करती हूँ। माँ ने जल्दी से अपना पर्स सोफे पर फेकते हुए किचन में गयी, और संजू को कपडे बदलने और हाथ पैर धोने के लिए कहा। संजू सोफे पर ही बैठे बैठे फिर सोने लगा। माँ ने आकर संजू को बाथरूम में ले गयी और उसका हाथ पैर धुलाया और खाने के लिए मेज पर बिठाया फिर खाना परोसा।

खाना खाते खाते संजू कुछ सोचने लगा। उसे वे दिन याद आने लगे जब उसके पापा भी थे, तब घर में खुशियों का फव्वारा बना रहता था। पापा कि हशी, पापा के चुटकुले घर को रंगीन बना देते थे। पापा उसे प्यार से मुन्ना बुलाते थे। संजू कि कोई भी परेशानी होती थी तो उसके पापा ही हल करते थे उनके पास सबका हल होता था।

संजू के पापा बहुत बहादुर थे। एक बार उसे याद आया जब उसके पापा ऑफिस से आइस क्रीम लाये थे। तीनो के लिए अलग अलग फ्लेवर कि थी, जो घर तक आते आते पिघल चुकी थी। माँ ने कहा “क्या इतनी गर्मी में आइस क्रीम यु ही जमी रहेगी?” फिर पापा ने तीनो आइस क्रीमो को मिलकर एक न्य फ्लेवर वाला मिल्क सेक बनाया।

अचानक माँ के कोमल हाथ संजू के बालो को सहलाने लगे। फिर माँ ने संजू से कहा क्या बात है इतने गम सुम क्यू हो? क्या बात है? आज किसी से झगडा तो नहीं हुआ या तुम्हारी टीम मैच गयी क्या? संजू ने कहा नहीं ऐसा कुछ नहीं है, आज मुझे पापा कि बड़ी याद आ रही है।

पापा को भगवान् ने अपने पास क्यू बुला लिया? इनता सुनते ही माँ ने संजू को अपने गले लगा लिया और उसकी आँखों में आंसू भर गये। यह देखकर संजू का उदास मन और उदास हो गया। उसे लगा कि जैसे इसी क्षण वह बहुत बड़ा हो गया हो और उसकी माँ कि जिम्मेदारी उसके कंधो पर आ गयी है। उसने ठान लिया कि अपने आसुओ से माँ को कमजोर नहीं होने देगा।

उसकी माँ घर का, बाहर का सब काम करती थी। उसे हमेशा खुश रखने का काम करती थी। अब वह कभी नहीं रोयेगा। वह अपने पापा कि तरह बनेगा। हमेशा खुशियों को बाटने वाला और तकलीफों पर पाँव रखकर आगे बढ़ने वाला बनेगा। वह माँ को हमेशा खुश रखेगा। इतना सोचते सोचते वह जल्दी जल्दी खाना खाने लगा।

अगले दिन जल्दी उठाकर संजू ने माँ से छिपकर अपने गुल्लक से पांच रूपये निकला और स्कूल चला गया। स्कूल से आकर वह माँ से बोला देखो माँ मै तुम्हारे लिए क्या लाया हूँ? और लिफाफा माँ के आगे रख दिया, माँ ने लिफाफा खोलकर देखा तो उसमे आइस क्रीम थी लेकिन वह पिघल चुकी थी।

माँ ने कहा तुम भी बस क्या इतनी गर्मी में और संजू ने वाक्य पूरा करते हुए कहा “आइसक्रीम यु ही जमी रहेगी? और दोनों खिल खिलाकर हस दिए।


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