यादों के फूल: कॉलेज का पहला दिन

21 August, 2020
Yado ke phool

स्कूल ड्रेस से छुटकारा, पहली बार जीन्स और मस्ती का मूड।

जूनियर कॉलेज का पहला साल सुरु हुआ था सबकुछ नया नया अनुभव हो रहा था स्कूल के समय के कोई मित्र और शिक्षक कोई भी नहीं थे, सब लोग और सब चेहरे बिलकुल नए थे एकदम अनजान सा माहोल था।

कॉलेज में वह सुरेश का पहला दिन था विषय भी एकदम नए थे जिनके बारे में पहले कभी भी न सुना और नहीं देखा था। क्लास सुरु हुई प्रोफ़ेसर क्लास के अन्दर आये और सभी विद्यार्थियों ने उन्हें Good Morning बोला उनका अभिवादन किया प्रोफ़ेसर ने भी विद्यार्थियों का धन्यवाद किया और अपनी कुर्सी के पास जाकर खड़े हो गए और सभी विद्यार्थियों को देखने लगे सब एकदम नए चेहरे लग रहे थे, एक नयी उमंग और नए जोश के साथ रंग बिरंगे कपड़ो में थे और सभी विद्यार्थी एकदम उत्साहित भी लग रहे थे, क्योकि कॉलेज का यह समय सभी विद्यार्थियो के जीवन का एक मोड़ एक टर्निंग पॉइंट होता है विद्यार्थियो के जीवन को एक नयी दिशा प्रदान करता है। यही से फैसला होता है कि वो आगे चलकर क्या बनेंगे और सभी के मन में अनेक तरह के सपने होते है कि कॉलेज में ऐसा करेंगे वैसा करेंगे अच्छे नंबर से पास होंगे घुंगे फिरेंगे और न जाने क्या क्या।

कॉलेज का पहला दिन था और प्रोफ़ेसर और विद्यार्थी दोनों एक दुसरे से अंजान थे इसलिए प्रोफ़ेसर ने सभी विद्यार्थियो को अपना परिचय दिया और विद्यार्थियो से उनका नाम और दसवी कक्षा के नंबर पूछा, सबसे जान पहचान कि और उसके बाद विषयो के बारे में बताया कि कितने विषय होते है कौन से लेखक कि पुस्तक ख़रीदे और भी बहुत सी जरुरी जानकारी दी।

कुछ देर में उनका समय समाप्त हुआ और क्लास में दुसरे प्रोफ़ेसर आये उन्होंने भी ऐसा ही किया जैसा कि पहले प्रोफ़ेसर ने किया पहला दिन जान पहचान ने ही निकल गया और क्लास ख़तम हुआ और सभी विद्यार्थी क्लास के बहार आ गये सभी विद्यार्थी भी एक दुसरे से अंजान थे इसलिए सभी आपस में मिलकर बाते करने लगे और लडकिया भी थी उनका भी ग्रुप बन गया सभी आपस में घुल मिल गये सिर्फ सुरेश को छोड़कर, सुरेश शर्मीला किस्म का लड़का था और डरपोक भी था इसलिए उसने किसी से दोस्ती नहीं कि वह चुपचाप अपने घर चला गया।

सुरेश क्लास में हमेशा पीछे बैठता था इसलिए उसकी दोस्ती भी उन ही लोगो से हुई जो कि पीछे लास्ट बेंच के आस पास बैठते थे और पीछे भी वाही बैठते थे जो पढाई में कमजोर होते है या फिर मस्ती करने के लिए पीछे बैठते है। धीरे धीरे सुरेश कि भी पीछे बैठने वालो से दोस्ती हो गयी और उसका भी एक ग्रुप बन गया और सुरेश भी उनके साथ घुल मिल गया अब उसे कॉलेज में आना जाना अच्छा लगने लगा वह भी अब पीछे बैठकर चालू क्लास में मस्ती करने लगा और कई बार तो अपने क्लास से मस्ती करते हुए पकडे जाने पर बहार भी निकला गया।

ऐसे ही दिन बितते गये और पहली परीक्षा का समय आ गया, परीक्षा का टाइम टेबल मिल गया। परीक्षा का पहला दिन था सभी बहुत उत्साहित थे सभी विद्यार्थी समय से पहले ही परीक्षा कक्ष में आकर बैठ गए थे परीक्षा में सभी बेंच पर दो विद्यार्थियों का रोल नम्बर दिया गया था कि एक बेंच पर दो विद्यार्थी बैठेंगे अलग अलग कक्षा के एक ११ का और एक १२ का। सभी बेंच पर दो विद्यार्थी बैठ चुके थे और परीक्षा का समय सुरु होने में सिर्फ ५ मिनट रह गए थे लेकिन सुरेश कि बेंच पर कोई नहीं आया सुरेश अकेला ही बैठा था।

Yado ke phool part 1

सुरेश मन ही मन सोच रहा था कि उसके बगल में कौन आयेगा लड़का या लड़की अब परीक्षा सुरु होने में दो मिनट ही रह गये थे तभी एक लड़की क्लास में दौड़ती हुई आई सभी कि नजरे उस लड़की को देखने लगी वह लड़की देखने में बहुत ख़ूबसूरत थी, सुरेश भी उसे देखकर बहुत प्रसन्न हुआ और सोचने लगा कि उसे उस लड़की के साथ बैठने का मौका मिले और हुआ भी वही वह लड़की अपनी सीट तलासते हुए सुरेश के पास आई और सीट पर बैठ गयी।

सुरेश कि ख़ुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहा सुरेश उस लड़की को निहारने लगा उस लड़की ने भी सुरेश को देखा और सुरेश को हेल्लो बोला और अपनी उत्तर पत्रिका मिलने का इन्तजार करने लगी। क्लास के सभी लड़के सुरेश से जलने लगे कि इतनी खुबसूरत लड़की सुरेश के पास बैठी है और सुरेश के दोस्त सुरेश को चिड़ाने लगे।

परीक्षा सुरु हुई सभी चुपचाप अपने उत्तर पत्रिका में लिखने लगे सुरेश भी लिख रहा था, लेकिन उसके मन में तो कुछ और भी चल रहा था, सुरेश बार बार अपनी तिरछी नजरो से उस लड़की को देख रहा था उस लड़की ने भी सुरेश को देखा कि वह उसे देख रहा है लेकिन वह उत्तर लिखती रहती और कुछ देर बाद समय समाप्त हुआ सभी ने अपनी उत्तर पत्रिका जमा करवाई और बहार चले गये, सुरेश उस लड़की को देखता रहा लेकिन उसने सुरेश को नहीं देखा सीधा क्लास के बाहर चली गयी।

सुरेश वही बैठ कर अपना पेपर लिख रहा था जब सुरेश का पेपर लिख कर हुआ और वह क्लास के बहार आया और उस लड़की को यहाँ वहा देखा लेकिन वह लड़की कही नहीं दिखी शायद वह लड़की कॉलेज से जा चुकी थी। सुरेश परीक्षा कि चिंता छोड़ कर उस लड़की के बारे में सोच रहा था और मन ही मन बहुत खुश भी था, सुरेश भी अपने घर चला गया और अगले दिन के बारे में सोचने लगा कि कल जब वह उस लड़की के साथ क्लास में होगा तब क्या बाते करेगा और कैसे करेगा क्योकि उसे थोडा डर भी लग रहा था यह सब विचार सुरेश के मन में चल रहे थे।

शाम हो गयी सुरेश ने कल कि परीक्षा कि तैयारी कि और सो गया। अगले दिन सुरेश अपने समय पर उठा और कॉलेज जाने के लिए तैयार हुआ लेकिन आज कि तैयारी कुछ खास थी, क्योकि उसे उस लड़की को अपनी ओर आकर्षित करना था और उससे बाते करनी थी और बहुत कुछ। इसलिए सुरेश ने इत्र भी लगाया अपने कपड़ो पर और कॉलेज पहुच गया और अपनी सीट पर बैठ गया और उस लड़की के आने का इंतजार करने लगा।

आज सुरेश बहुत ही उत्साहित लग रहा था परीक्षा कक्ष में कुछ ही मिनट के बाद वह लड़की भी क्लास में आई और सुरेश के बगल में बैठ गयी सुरेश एक तरफ बहुत उत्साहित भी था और दूसरी तरफ डर भी रहा था कि उससे बात कैसे करू क्योकि उसने आज से पहले किसी भी लड़की से बात नहीं कि थी, उस लड़की को भी यह अहसास होने लगा था कि सुरेश कुछ कहना चाहता है लेकिन सुरेश कि हिम्मत मनाही हो रही है या तो सुरेश शर्मा रहा है। इसलिए उस लड़की ने ही सुरेश से बात किया और उसका नाम पूछा और सुरेश कि तरफ दोस्ती का हाथ बढाया।

वह लड़की खुले विचारों वाली लग रही थी, लेकिन सुरेश कि हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह उस लड़की का नाम पुछ ले फिर परीक्षा सुरु हुई और सब ने अपना लिखना सुरु किया और जिसका लिख कर हो जाता वह अपनी कॉपी जमा कर के क्लास के बहार चला जाता, उस लड़की का भी हो गया और वह भी बहार चली गयी उसके दस मिनट बाद सुरेश भी कॉपी जमा करवा कर बहार आया लेकिन आज भी उसे वह लड़की नहीं दिखी।

तीसरे दिन सुरेश ने निश्चय किया कि वो आज हिम्मत जुटा कर के उस लड़की से बात करेगा और उसका नाम भी पूछेगा, परीक्षा का तीसरा दिन भी सुरु हुआ और वह लड़की भी आई लेकिन आज भी सुरेश हिचकिचा रहा था उसका मन आगे पीछे हो रहा था, परीक्षा सुरु होने के कुछ देर बाद उस लड़की को एक प्रश्न नहीं आ रहा था वह हिंदी का पेपर था और व्याकरण का प्रश्न था, उसने धीरे से सुरेश को इशारे में पुछा कि उसे इस प्रश्न का उत्तर पता है क्या सुरेश जो चाह रहा था वही हुआ और सुरेश सुरु से ही हिंदी माध्यम से पढ़ा लिखा था इसलिए उसकी हिंदी कि जानकारी अच्छी थी सुरेश ने उस लड़की कि तरफ देखा और कहा कि हा मुझे इसका उत्तर पता है सुरेश ने उस लड़की को उसका उतार बताया और उस लड़की ने उत्तर लिखा और सुरेश का सुक्रिया अदा किया, सुरेश को उसकी मदद करके अच्छा लगा आगे उस लड़की ने सुरेश से और कई पश्नो के उत्तर पूछे और सुरेश ने बताये भी जिससे वे दोनों आपस में घुल मिल गये सुरेश और उसके बिच दोस्ती भी हो गयी पेपर ख़तम होने पर वह आज भी सुरेश से पहले चली गयी और सुरेश आज भी उसका नाम नहीं पुछ पाया। लेकिन सुरेश ने ठान लिया कि वो अगले दिन उसका नाम पूछेगा।

परीक्षा का चौथा दिन सुरु हुआ वह लड़की भी सुरेश के पास आकार बैठ गयी और सुरेश ने हिम्मत करके उस लास्की का नाम पुछ लिया, उस लड़की ने अपना नाम भावना बाताया। सुरेश बड़ा ही खुश हुआ उस लड़की का नाम जानकर कर क्योकि नाम पूछने में उसने कितने दिन लगा दिया और कितनी हिम्मत करनी पड़ी यह सुरेश का पहला अनुभव था एक लड़की के साथ बैठने का। उस दिन भी भावना अपना पेपर जमा करवा कर चली गयी और सुरेश उससे मिल नहीं पाया, सुरेश भावना से क्लास के बहार मिलना चाहता था क्योकि क्लास में सब उसे देख रहे थे और सुरेश को हिचकिचाहट भी हो रही थी बहार ऐसा कोई डर नहीं रहता और यह उसका पहला अनुभव हो रहा था।

परीक्षा का पांचवा दिन आ गया सुरेश अपनी बेंच पर बैठा था भावना भी आई दोनों ने एक दुसरे हो Hi Hello किया और कुछ बाते हुई, दोनों के चेहरे पर मुस्कराहट थी सुरेश का भी आत्मविश्वास बढ़ गया था इसलिए वह भी भावना से नज़रे मिला कर बाते करने लगा और दोनों के बिच दोस्ती हो गयी सुरेश भी परीक्षा के बिच में जान बुझकर भावना से कुछ प्रश्न के उत्तर पूछ लेता सिर्फ भावना कि आवाज सुनने के लिए भावना भी सुरेश कि मदद कर देती थी और पांचवा दिन भी ख़तम हो गया भावना भी पेपर जमा कर के चली गयी सुरेश पांचवे दिन भी भावना से क्लास के बाहर नहीं मिल पाया।

अब परीक्षा का अंतिम दिन था छठा दिन और अंतिम पेपर रोज कि तरह सुरेश आया और भावना भी आई दोनों अपनी सीट पर बैठ गये एक दुसरे कि तरफ देख कर मुस्कुराये कुछ बाते कि सुरेश भावना का फोन नंबर जानना चाहता क्योकि उसे लग रहा था कि वह भावना के संपर्क में रहे क्योकि आगे चलाकर सुरेश कि मुलाकात भावना से हो पाएगी या नहीं।

परीक्षा सुरु हुई सबने लिखना सुरु किया परीक्षा का अंतिम दिन था इसलिए सब जल्दी जल्दी परे लिख रहे थे क्योकि परीक्षा का समय तनाव पूर्ण रहता है और आज उससे छुटकारा मिलने वाला था और सुरेश भी जल्दी में था क्योकि आज भी यदि भावना सुरेश से जल्दी चली गयी तब पता नहीं कब मिलेगी इसलिए पेपर जल्दी ख़तम करके भावना के साथ कुछ वक्त गुजार लेने का और भावना का फोन नंबर जानने का विचार था, लेकिन अंतिम दिन भी सुरेश लिखता रहा उसका पेपर पूरा नहीं हो पाया और भावना अपना पेपर जमा करवा कर चली गयी।

सुरेश भी भावना के जाते ही जल्दबाजी में अपना पेपर जमा करवा कर बाहर आया कि भावना से कुछ बात हो जाए लेकिन आज भी उसे भावना नहीं दिखी, सुरेश भागता हुआ सीढियों से निचे गया और चारो तरफ देखने लगा लेकिन उसे भावना नहीं दिखी फिर सुरेश भी घर चला गया और भावना के साथ बिताये हुए पलो को याद करने लगा। अगले दिन रविवार कि छुट्टी थी और परीक्षा भी ख़तम हो चुकी थी एकदम आराम का दिन था, सुरेश के लिए वह रविवार को सुबह क्रिकेट खेलने चला गया पूरा दिन सुरेश क्रिकेट में व्यस्त था और शाम को घर पर आराम किया खाना खाया और भावना के बारे में सोचते हुए सो गया।

यादों के फूल | कॉलेज की वो यादें जो भुलाए नहीं भुलती | Part 2
- RAKESH PAL