प्रिया और विशाल मन ही मन एक दुसरे को चाहने लगे..

August 07, 2020
Ek ladki ka pehla pyaar

प्यार एक नशा है दुसरे शब्दों में प्यार को मीठा जहर भी कहते है

ये कहानी प्रिया कि है। जब उसे पहली बार किसी से प्यार हुआ था। यह उस समय कि बात है जब प्रिया का बीएससी(BSC) का पहला साल चल रहा था। प्रिया उस समय अठारह साल कि थी पढने में होशियार थी स्वाभाव से नटखट थी। वह रोज कि तरह अपने कॉलेज(college) आया जाया करती थी पढाई लिखाई करती थी और सामान्य जीवन व्यतीत कर रही थी सबकुछ ठीक थक चल रहा था।

तभी प्रिया के पड़ोस में एक लड़का आया कुछ महीनो के लिए जिसका नाम विशाल था। विशाल कि उम्र पच्चीस साल थी वह दिल्ली में रहता था। विशाल जिसके यहाँ रहता है वे उसके रिश्तेदार थे। कुछ दिन बीतने के बाद विशाल कि जान पहचान प्रिया के घरवालो से हो गयी है, क्योकि विशाल के रिश्तेदारों का पहले से ही प्रिया के घरवालो से अच्छे सम्बन्ध थे।

विशाल का प्रिया के घर पर आना जाना सुरु हो गया और प्रिया से मिलाना जुलना भी बढ़ गया। धीरे धीरे विशाल और प्रिया रोज एक दुसरे से बाते करने लगे और ज्यादातर उनकी बाते फ़ोन पर होती थी।

जिस दिन वे एक दुसरे से बात नहीं करते तो ऐसा लगता कि जैसे दिन ही नहीं बीत रहा हो। कुछ अजीब से बेचैनी होने लगती किसी भी काम में मन नहीं लगता भूख और प्यास भी नहीं लगती थी।

प्रिया को समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है? और क्यू हो रहा है? धीरे धीरे यह छोटी सी मुलाकात और हसी मजाक कब प्यार में बदल गया कुछ पता ही नहीं चला। प्रिया और विशाल मन ही मन एक दुसरे को चाहने लगे लेकिन दोनों ने इस बात का एक दुसरे से इजहार नहीं किया था।

बस एक दुसरे को देख कर एक अजीब सा सुख मिलता था और दिल में एक अजीब सी हलचल होती थी, जो बहुत ही सुखद अनुभव देती थी जिसे शब्दों में बया करना मुस्किल है। बहुत ही प्यारा सा अहसास होता था वो।

एक बार समय का कुछ ऐसा संयोग बन गया कि विशाल और प्रिया कि एक दुसरे से तीन चार दिन तक बात नहीं हो पायी दोनों बहुत ही बेचैन थे एक दुसरे से मिलने और बात करने के लिए। उस दिन विशाल ने बहुत कोशिश कि प्रिया से बात हो जाये लेकिन प्रिया का मोबाइल फोन प्रिया कि माँ के पास था, कई बार प्रयास करने के बाद भी विशाल कि और प्रिया कि बात नहीं हुई फिर विशाल ने तय किया कि वो प्रिया को मिलकर ही रहेगा।

विशाल को जैसे प्यार का नशा चढ़ गया था। प्यार एक नशा है दुसरे शब्दों में प्यार को मीठा जहर भी कहते है। विशाल शाम को प्रिया के घर गया और प्रिया उसे कही नज़र नहीं आ रही थी विशाल प्रिया को देखने के लिए एकदम बेचैन था ऐसा लग रहा था मनो उसकी आँखे सिर्फ और सिर्फ प्रिया को ढूंढने रही है फिर किसी ने बताया कि प्रिया ऊपर छत पर है विशाल तुरंत छत पर गया और वह उसे प्रिया दिखी तब जाकर विशाल के जान में जान आई लेकिन विशाल इतना बेचैन हो चूका था और तड़प रहा था कि उससे रहा नहीं गया और बिना कुछ सोचे समझे बिना कुछ बातचीत किये प्रिया को अपने सीने से लगा लिया और आहे भरने लगा ऐसा लग रहा था जैसे उसे सबकुछ मिल गया हो अब और कुछ पाने कि चाहत नहीं रही।

यह सबकुछ अचानक हो गया ऐसा लगा कि जैसे अपने आप हो गया इसपर विशाल का कोई कंट्रोल नहीं था और प्रिया भी कुछ समझ नहीं पायी हलाकि कि बेचैन प्रिया भी थी विशाल से मिलने के लिए इसलिए प्रिया भी कुछ नहीं बोली उसे भी विशाल के बाहों मेंं बहुत सुकून मिला जिसकी उन दोनों के कभी कोई कल्पना भी नहीं कि थी। जबकि ऐसा मिलन उन दोनों के बिच कभी नहीं हुआ था सिर्फ बाते ही होती थी लेकिन वो अहसास एकदम अलग था जिसने उन दोनों को दो जिस्म और एक जान में बदल दिया।

उस दिन से प्रिया कि जिंदगी पूरी तरह से बदल गयी उसके स्वाभाव में परिवर्तन दिखने लगा प्रिया अब सबसे अलग रहने लगी और विशाल से छुप छुप कर मिलने लगी और विशाल के प्यार में डूब गयी। उधर विशाल का समय पूरा हो गया था विशाल को वापस अपने घर दिल्ली लौटना था जुदाई का समय आ गया था प्रिया और विशाल दोनों बहुत मायूस थे।

प्रिया को बहुत रोना आ रहा था लेकिन क्या करे और कोई चारा न था। विशाल ने दिल्ली जाने से एक दिन पहले प्रिया को मिलने के लिए बुलाया और एक रेस्टोरेंट में ले गया वह उन दोनों ने एक दुसरे को जी भर के देखा और अपने दिल कि बात एक दुसरे से कही एक दुसरे को समझाया और दुबारा मिलने कि बाते कि दोनों ही बहुत भावुक थे प्रिया के आँखों से आंसू छलक रहे थे वह विशाल से जुदा नहीं होना चाह रही थी।

प्रिया बहुत उदास थी उसे विशाल के जाने का गम सता रहा था विशाल ने प्रिया को समझाया और मस्ती करने लगा किसी तरह से प्रिया के चेहरे पर मुस्कान लाया दोनों ने कुछ खाया और फिर विशाल में प्रिया को उसके घर पहुचा दिया और दुसरे दिन विशाल दिल्ली अपने घर वापस चला गया।

प्यार वो अहसास है जो न मिलने पर लाखो कि भीड़ में अकेला कर देती है और मिल जाये तो दुनिया में और किसी कि चाहत ही नहीं रहती है।

... कच्ची उम्र का पहला प्यार - Part 2
- RAKESH PAL