एक छोटी सी लव स्टोरी

Feb 13, 2018
Ek choti si love story

पहली मुलाक़ात भूलती ही नहीं है जब पहली बार उसकी आँखों पर ही नजर पड़ी थीं।

ग्रेजुएशन कम्पलीट किये बिना ही एक छोटी सी आईटी कपनी में As Designer जॉब की शुरुवात हुई। और वही से बोरिंग लाइफ की भी शुरुवात हो गयी ऑफिस से सीधा घर और घर से सीधा ऑफिस क्यों की दोस्त कम थे और जो भी थे कुछ Study कर रहे थे या तो कही Job पे लग गए थे।

ऐसे में हर रोज - रोज की तरह बीतने लगी और लाइफ भी बीतने लगी। ऑफिस में भी सिर्फ ३ ही लोग थे मै, एक हम उम्र दोस्त और एक सीनियर पर्सन। इसी में डेढ़ साल बीत गये। Date थी 14th August, 2012. उस दिन मैंने ऑफिस से half Day लेकर मै ड्राइविंग टेस्ट के लिए आरटीओ ऑफिस गया, टेस्ट हुआ और लंच के बाद ऑफिस पहुंचा। अंदर आते ही सबसे पहले नजर जिस पर पड़ी वह थी आंखे, ख़ूबसूरत आंखे, बड़ी बड़ी आँखों वाली एक लड़की जो सामने बैठी थी। कुछ ही देर के लिए नजरे मिली और हट भी गयी और कुछ देर के बाद रोज की तरह ही फिर से वर्क स्टार्ट हुआ और शाम तक पता चला New Joining हुआ है उसका।

१-२ दिन ऐसे बीत गए बिना किसी बात के, किसी का किसी से भी कुछ इंटरैक्शन नहीं हुआ क्यों की सब अपने काम में बिजी रहते थे सिर्फ ऑफिस आना जाना ही हुआ और इसमें १-२ दिन बीत गए। उसके अगले दिन उस लड़की ने अपनी चुपी तोड़ी और लोगो से बात करनी सुरु की और इस तरह से धीरे धीरे सबसे कुछ न कुछ बात शुरू हुई, कुछ दिनों तक सब ऐसे ही चलते रहा पर धीरे धीरे हम दोनों अब थोड़ा करीब आने लगे और करीब आते चले गए पता ही नहीं चला। पहले थोड़ी - थोड़ी बात शुरू हुए और फिर Office से Station तक भी साथ जाने लगे और बाद में स्टेशन से Office साथ आने भी लगे।

अब साथ आना जाना अच्छा लगने लगा और साथ आने जाने के लिए एक दूसरे का इंतजार भी करने लगे। ये दोस्ती थी या पहला पहला वाला प्यार था जो भी था किसी जन्नत से काम नहीं था जिंदगी जैसे बदल रही थी, वही बोरिंग ऑफिस अब किसी और दुनिया जैसी लगने लगी अब ऑफिस आने में अलग ही ख़ुशी थी क्यों की अब हम ऑफिस में पुरे दिन एक दूसरे के सामने रहते थे।

वक्त बीतता गया और नजदकियां गहरी होती चली गयी उसकी वो बड़ी बड़ी आँखे और कभी न ख़त्म होने वाली बाते दोनों का होना किसी खुबसूरत पल से कम न थी।

हम दिन भर उसी ऑफिस में फेसबुक पे बाते किया करते थे, घर जाने के बाद व्हाट्सअप पर बाते किया करते थे, उसकी आवाज़ में एक अज़ीब सा जादू था जो अपनी ओर मुझे खींचा करती थी। लंच टाइम में करीब आके बैठना और साथ में खाना और शाम को कुछ पल रेलवे स्टेशन पर बैठना जब तक हमारी ट्रैन नहीं आ जाती थी।

हर सुबह रोज उसका स्टेशन पे इंतज़ार करना अच्छा लगता था और फिर बाते करते करते साथ ऑफिस तक आना, बीच बीच में उसको निहारना, उसकी मुस्कान को देखना सब कुछ नया नया सा था मानो अब किसी और की जररूरत ही नहीं रही। जब भी ऑफिस में कोई नहीं रहता तब मै उसके पास जाकर बैठ जाया करता था और हमेशा उस के पास जाने का कोई ना कोई बहाना दुढ़ता ही रहता था वो थी ही इतनी खूबसूरत। जब भी वो अपनी सफ़ेद रंग की ड्रेस में आती थी उस दिन लगता था जैसे की वो दूध में नहाई हुई कोई परी हो जो जमीं पर उतर आयी हो। दिल में उसकी ही तस्वीर बस गयी थी उसके अलावा कुछ और सूझता है नहीं था।

हम कुछ महीने ही साथ थे, उसे ऑफिस छोड़ना पड़ा आगे की स्टडी के लिए, दिल बैठ सा गया था मेरा क्यों की मुझे पता था की अब हम फिर से पहले की तरह नहीं मिल सकते है और ना ही पहले की तरह हम पुरे दिन साथ में रह सकते। उसका इस तरह से जाना किसी सजा से कम न था, साथ में बिताये हुए पल रह रह कर दिल को उस उदासी के गहरी खाई में ले जाते जहा से कुछ न सूझता। कई दिन तो ऐसे ही बीत गए, अब वो ऑफिस पहले की तरह फिर से सुना हो गया जो पहले उसकी आवाज़ से गूंजा करती थी।

Missing You I Love You

कई साल बीत गए पर वो पहली मुलाक़ात भूलती ही नहीं है जब पहली बार उसकी आँखों पर ही नजर पड़ी थीं वो बड़ी बड़ी खुबसूरत आँखे और साथ बिताए हुए पल और उसकी आवाज़ आज भी उसी तरह से कानो में गुंजती हैं।

(wo ai ni)