नींद क्या है? | How Much Do You Sleep | नींद का मतलब

नींद की कमी स्वास्थ्य और कामकाजी जिंदगी को प्रभावित कर सकती है।

नींद क्या है? sleep जैसा कि हम सब जानते है कि जीवन के लिए जल अत्यंत आवश्यक है। जल के बिना हम एक दिन भी नहीं रह सकते है। जल ही जीवन है। ऐसा भी कहा जाता है, और यह प्रमाणित भी है। उसी प्रकार भोजन के बिना भी हम एक महीने से उपर जीवित नहीं रह सकते है। लेकिन क्या आपको पता है कि हम नींद के बिना कितने दिनों तक जीवित रह सकते है?

तो आइये आज हम नींद के बारे में बात करते है। जिस प्रकार जल और भोजन हमारे लिए अत्यंत उपयोगी है उसी प्रकार नींद भी हमारे ले अत्यंत उपयोगी है एक बार तो हम बिना भोजन के एक महिना या उससे अधिक दिन भी जीवित रह सकते है लेकिन बिना सोये या बिना नींद लिए हम ग्यारह दिन (11 days) से अधिक जीवित नही रह सकते है। तो आइये आज हम नीद के बारे में विस्तार से बात करते है।

नींद एक चमत्कारी दुनिया है एक अलग ही दुनिया है। सोने के पश्चात् हम एक अलग ही दुनिया में पहुच जाते है। जिस पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं रहता है। नींद में हमें कुछ पता नहीं रहता है। नींद एक रहस्य है। हमें नींद क्यों आती है यह एक रहस्य है इसके बारे में किसी को भी पता नहीं है और यह नींद अपने आप ही आती है और किसी भी वक्त आ जाती है। हम रोज सोते है रोज जागते भी है।लेकिन फिर भी हम न तो नींद को जानते है और न ही जागने को जानते है। नींद तो हम सब रोज लेते है, क्या कभी आपने गौर किया आप रोज सोते है नींद लेते है लेकिन कभी आपको यह पता नही चलता कि कब आप सो गये? या आपको नींद आ गयी।

बस आप गायब हो जाते है। न कोई रिश्ता रहता है न कोई दोस्ती और न ही कोई दुश्मनी रह जाती है। और न ही कोई भविष्य कि प्लानिंग होती है। और न ही कोई भूतकाल का डर रहता है। सब शून्य हो जाता है। आपने जो इस दुनिया में अपना अस्तित्व बनाया हुआ है वह जैसे ख़त्म हो जाता है। और कुछ भी नही बचता। यह जो कुछ भी है वह सब आपके होने से है। आप नही है तो कुछ भी नही है। आप है तो सबकुछ है। लेकिन यह बात थोड़ी गहरी है। शब्दों में समझ में नही आने वाली। होने और न होने वाली बात सबपर लागु होती है। यह दुनिया यह संसार यह ब्रम्हांड हर किसी के लिए अलग अलग है। लेकिन यह अलग अलग होने कि बात मन के प्रथम स्थर पर जिसपर हम सभी जीते ही है पर ही लागु होती है।

मन का यही स्तर एक ही चीज में हजारो प्रकार के अंतर प्रकट कर सकता है। और मन का यही प्रथम स्तर आप स्वयं भी है। मन के बाकी स्तर भी आपके पूर्ण निर्माण के सहायक होते है। लेकिन वह सक्रीय होकर भी आपके समक्ष कभी नहीं आते है। जैसे नींद तो आती है लेकिन आप कभी नींद को महसूस नही कर पाते। नींद अपना खेल करके चली जाती है। और आपको कुछ पता भी नहीं चलता है। आप या तो नींद के पहले कि स्थिति को जानते है या नींद के बाद कि स्थिति को जानते है। नींद को नही जानते। मन का एक और स्तर होता है जिसे हम अचेतन मन यानि subconsius mind कहते है। जब हम बहुत अधिक नशा कर लेते है तब हम इसी subconsius mind के दहलीज पर आ जाते है। consius mind यानि चेतन मन अवरुद्ध होने लगता है। क्योकि चेतन मन को शक्ति अचेतन मन से ही मिलती है। लेकिन अचेतन मन कि दहलीज पर सबकुछ अधुरा रहता है। प्रेम होता है लेकिन प्रेम नहीं रहता, क्रोध होता है लेकिन क्रोध नहीं रहता, यादे होती है लेकिन कुछ याद नहीं रहता है। याद रहता भी है लेकिन धुंधला सा रहता है, स्पस्ट नही होता।

यह सब मन के प्रथम स्तर पर होता है। यानि कि यह सब चेतन मन पर आकर ही सम्पूर्ण आकर लेती है। तब हम अपनी भावनाए प्रकट कर पाते है। मन में तिन प्रकार के दरवाजे होते है इस तरह से समझते है। पहला दरवाजा हम खुद ही है, यानि consius mind। दुसरा दरवाजा यानि subconsius mind। नींद मन के तीसरे दरवाजे को खोल देती है। और यह तब होता है जब चेतन मन और अचेतन मन कि उर्जा निश्चित स्तर से निचे आ जाती है। अब इन दोनों दरवाजो को काम करने के लिए उर्जा कि आवश्कता होती है। बिना उर्जा के यह ठीक से काम नही कर सकते है, और शांत रहते है। दुसरे दरवाजे के पास रिजर्व उर्जा रहती है, लेकिन यह इसका उपयोग तभी करता है जब कोई खास मौका हो। दोनों दरवाजो के शांत होने के बाद इसी शांति से नींद का आरम्भ होता है। यह तीसरा दरवाजा खुला हुआ नही होता है। नींद ही इस दरवाजे को खोलती है। और आपको भीतर ले जाती है।

यह सब कार्य प्राकृतिक रूप से होता है। दवाई खाकर ली हुई नींद आपको इस दरवाजे के अन्दर नहीं ले जा सकती है। क्योकि नींद कि दवाई आप तभी खाते है जब आपका मन ठीक से कार्य नही करता है। आप बेचैन रहते है मन में हजारो प्रकार के विचार आते रहते है। और ये विचार शांत होने का मान नही लेते है। इस समय दूसरा दरवाजा अपने रिजर्व उर्जा का इस्तेमाल कर रहा होता है, फिर भी नींद कि दवा लेने के बाद भी एक दो क्षण के लिए जब प्राकृतिक स्थिति बनती है तब आप तीसरे दरवाजे में प्रवेश कर जाते है। तब यह ख्याल अत है कि तीसरे दरवाजे में क्या है?

जिस प्रकार एक समुन्द्र के अनगिनत किनारे हो सकते है। उन किनारों पर अनगिनत लहरे हो सकती है लेकिन फिर भी समुन्द्र कि गहराई में जहा बिलकुल शांति रहती है जहा कोई लहर नही होती सभिरे एक साथ हो समुन्द्र को प्रदर्शित करती है। इसी तरह जब आप तीसरे दरवाजे में प्रवेश करते है तब आप विराट के साथ एक हो जाते है। जैसे एक माँ के गर्भ में बच्चा पूर्ण रुप से अपनी माँ से जुड़ा रहता है। ठीक उसी प्रकार आप विराट अस्तित्व से जुड़ जाते है। यहाँ रोज के आधार पर सूचनाओ का आदान प्रदान होता है। पुरे ब्रम्हांड में हर कोई किसी न किसी से किसी न किसी रूप में जुड़ा होता है। नींद हमें एक नियंत्रण के साथ जाग्रत कर देती है, और इस जाग्रत अवस्था के साथ तीसरे दरवाजे में प्रवेश करते है। लेकिन नींद का पूर्ण नियंत्रण होता है। यहाँ हम याये नहीं बना सकते, यहाँ केवेल हम अहसास कर सकते है, और इस अहसास को भी याद नहीं किया जा सकता है।

नींद memorise नहीं करने देती। कभी कभी हम छोटे छोटे अहसास को साथ ले आते है। रातभर सोने पर भी हम चार या पांच मिनट तीसरे दरवाजे में रह पाते है। इन चार पांच मिनट में ही आप इतने उर्जा से भर जाते है कि पहला और दूसरा दरवाजा actve हो जाता है। जैसे ही पहला और दूसरा दरवाजा एक्टिव हो जाता है नींद आपको खीचकर तीसरे दरवाजे से बहार ले आती है। और वह दरवाजा बंद हो जाता है इसके बाद दूसरा दरवाजा यानि कि uncosius mind अपना काम सुरु करता है, और आप सपने देखने लगते है। और आपका पहला दरवाजा यानि consius mind काम करता है तब आप सपने से जाग जाते है, और सुबह अपने काम पर चले जाते है। यह काम पर जाने और दिनभर काम करने कि उर्जा उन चार पांच मिनट से ही आती है। इसलिए नींद भी बहुत जरुरी है एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए।

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