मिट्टी का महत्व १०० साल बाद…?

“मिट्टी है तो जीवन है” – Importance of soil

अगर हर जगह सिर्फ पानी ही पानी हो तो फसले कहाँ ऊगाई जाएँगी? मिट्टी कहा मिलेगी जिस पे फैसले उगाई जाये? मिट्टी कहा मिलेगी जिस पे घर बनाये जाये?

ऐसा क्या होगा जो कुछ वर्षों के बाद मिट्टी का महत्व बढ़ जायेगा या ऐसा क्या होने वाला है की मिट्टी की क़ीमत बढ़ जाएगी। आज जितनी सरलता से हमे मिट्टी मिल जा रही है और हम जैसा चाहे वैसे उसका इस्तेमाल कर रहे है।

पर सवाल ये है की ऐसा क्या होने वाला है की मिट्टी का महत्व बढ़ने वाला है? जी हाँ आज कल जिस तरह से बाढ़ का भयंकर रूप हमें हर साल पे साल देखने को मिल रहा है और उधर अंटार्टिका की बर्फ़ भी जिस तरह से पिघल रही हैं। इसी तरह से अगर यह सब चलता रहा तो हर तरफ सिर्फ पानी ही पानी रह जायेगा और ज़मीन की कमी बढ़ती चली जाएगी।

भारत कृषि प्रधान देश कहलाता है पर अब हर साल फसले बाढ़ की चपेट में आने लगी है जिस से अन्न की पैदावार में कमी हो रही है, बाढ़ की वजह से फसले बर्बाद हो जा रही है। फसलों का बर्बादी का ये मुख्य कारण है क्यों कि वो पानी में डूब जाती है बाढ़ में, और बाढ़ मिट्टी को भी बहा ले जा रही है अपने साथ, जिस से मिट्टी की उपजता भी काम हो रही है।

जमीनों का अतयधिक उपयोग अब घरों के निर्माण में यूज़ हो रहा है, company कारख़ाने लगाने में, सड़कों के निर्माण में। ऐसे में जमीनों की लगातार कमी होती जा रही है जंगलों और पर्वतों को भी काटा जा रहा है नदी नालों तथा कुओ और तालाबों को भी पाटा जा रहा हैं जमीन की कमी पूरी करने के लिए।

वर्ष 2019 और 2020 में कोरोना (covid-19) नामक एक छोटी सी बीमारी क्या फैली पूरी दुनिया ही रुक गयी, लोगो को घमंड था की पृत्वी पे ऐसा प्रलय कभी नहीं होगा। जल प्रलय का ही उल्लेख पुराणों में भी है। जो आपने नहीं देखा है वो क्या संभव नहीं या कभी वैसा होगा ही नहीं? ऐसा सोचना भी गलत है।

अब धीरे धीरे प्रकृति ने भी अपना बदला लेना सुरु कर दिया है वैसे ही जैसे मनुष्य प्रकृति को नुकसान पंहुचा रहा है। नदिया जैसे जैसे सिमटती जा रही है वैसे वैसे समुन्द्र अपना तट बढ़ाता जा रहा है वो ज़मीन को अपने अंदर समेटता जा रहा है। पृथ्वी पर केवल २५% ही जमीन है बाकी ७५% पानी है और उसमे से केवल 3 प्रतिशत जल ही पीने के योग्य है। बची हुए जमीन का हम इस्तेमाल कर रहे है पर जब ये भी पानी में डूबता चला जायेगा तब हम कहा रहेंगे और खाने-पीने की चीजे कहा से लायेंगे।

जमीन के लिए तो अब युद्ध भी होना शुरू हो गया है चीन (china) और पाकिस्तान (pakistan) का हमला अब बढ़ता ही जा रहा है नेपाल(nepal) ने भी अब भारत को आँख दिखाना शुरू कर दिया है। ऐसे में मिट्टी की सुरक्षा कौन करें और कैसे की जाए?

“जल ही जीवन है” (jal hi jeevan hai) ये नारा तो सदियों से चला आ रहा हैं पर “मिट्टी है तो जीवन है” (mitti hai to jeevan hai) ये भी नारा कब लगाया जायेगा और उसपे अमल में कब लाया जाएगा।

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