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Striya azad hui to pata chala samaj kyu inhe gharo me rakhta tha

Striya azad hui to pata chala samaj kyu inhe gharo me rakhta tha? “स्त्रियां आजाद हुई तो पता चला समाज क्यू इन्हें घरों में रखता था”

क्या मनुष्य सौ साल पहले इन सबकी कल्पना कर सकता था? हरगिज नहीं। उन्हें यह असंभव लग रहा था लेकिन आज यह हकीकत है की कुछ स्त्रियों को आज़ादी क्या मिली वे अपने अस्तित्व को ही भूल गयी, सारी लज्जा, शर्म, हया, मर्यादाएं लांघ गयी। परिवार-समाज के अनुशासन भूल गयी।

जब कोई व्यक्ति मर्यादा में नहीं रहता तो उसे अपयश का सामना करना पड़ता है। घुंघट से जब आज़ादी क्या मिली शरीर पर पहनने वाले वस्त्र छोटे हो गये। कुछ स्त्रियां लज्जा और निर्लज्जता की सारी हदें पार गयी।

‘लज्जा’ अगर स्त्री का गहना है, तो क्या ‘संयम’ पुरुष का नहीं होना चाहिये?

बिल्कुल होना चाहिए, यदि पुरुष संयम खोने लगेगा तब स्त्रियां लज्जा खोने लगेगी, इसके विपरित स्त्रियां लज्जा खोने लगे तो पुरुषों का भी संयम खोने लगेगा।

आदमी और औरत दोनों एक दूसरे के लिए हैं और दोनों एक दूसरे से ही हैं। इसलिए आदमी और औरत दोनों को एक दूसरे को सम्मान के दृष्टि से देखना चाहिए, समान भाव और इज़्ज़त, विश्वास रखना चाहिए।

चरित्र की कमजोरी, आदमी और औरत दोनों के लिए हैं। चरित्र यह किसी एक के लिए नहीं है यह दोनों के लिए सामान है और नियम भी दोनों को लिए एक ही है। 

कृपया किसी भी बातों को अन्यथा न लिया जाए। एक दूसरे के प्रति आकर्षण का नियम प्राकृतिक है। महिला और पुरुष दोनों ही एक दूसरे के लिए आकर्षित रहते हैं।

Striyo Ko bhi azadi ka hak hai

हम यह भी मानते हूँ कि हर किसी को अपनी तरह से जीने का अधिकार है और हर गलत निगाह का विरोध करने का भी।

परंतु का यह सही हैं की खुलेआम मर्यादा का उलंघन किया जाये पुरुष और महिला दोनों की तरफ से? जिस तरह से आज कल लड़के और लड़कियाँ दोनों ही शरीर और कपड़ों का ख़ुलेमाम प्रदर्शन कर रहे हैं आधुनिकता, मॉर्डन कल्चर के नाम पर। महिलाओं के कम कपड़ों के माध्यम से आधुनिकता को दर्शाने की कोशिश की जा रही हैं। 

क्यों आजकल शादीशुदा महिलायें सारी मर्यादाएं तोड़ कर दूसरे पुरुषों से शारीरिक संबंध बनाने के लिए किसी भी हद तक जाती है, जबरदस्ती गैर मर्दों को घर बुला कर अथवा गैर मर्दों के घर जाकर शारीरिक संबंध बनाने की पूरी कोशिश कर रही हैं?

अब महिलाएं खुलकर ऐसे सम्बन्ध बनाती है, बड़े शहरों में पति के काम पर जाते ही उनका बॉयफ्रेंड दिन भर के लिये आ जाता है दोनों फुल एन्जॉय करते हैं और अमीर महिलाएं तो लड़कों को काफी पैसे भी देती हैं।

कम उम्र मे सम्भोग का स्वाद चख चुकी लड़कियों मे लज्जा एंव डर खत्म हो जाता है। वे सदैव सम्भोग की इच्छुक रहती हैं और मौका मिलते ही काम करवा लेती हैं चाहे पुरुष उनका निकट सम्बन्धी ही क्यों न हो।

Striya azad hui to apni garima chhod di

Striya azad hui to pata chala samaj kyu inhe gharo me rakhta tha

स्त्रियां आजाद हुई तो पुरूषों के साथ नौकरी कर रही हैं दोस्ती कर रही हैं तो आपस में सेक्स सँबध बनना स्वाभाविक है। महिलाएं अब सेक्स करने शर्म नहीं करती हैं और उन्मुक्त विचारधारा उनमें बढ़ रही है अब तो विवाहित महिलाएं भी अपने शारीरिक सुख के लिए परपुरूष से सँबध बनाने भी हिचकिचाहट महसूस नही करती हैं यह महिलाओं में परिवर्तन का दौर है।

जिस कारण से मर्द गैर महिलाओं के साथ संबंध बनाते हैं वही कारण है महिलाएं गैर मर्दों से शारीरिक संबंध बनाने की पूरी कोशिश कर रही हैं।

जिस तरह से आज कल इंटरनेट पे अलग अलग अप्लीकेशन में वीडियो बनाये जा रहे है उस देख कर यही लगता है की ऑनलाइन मुजरा या ऑनलाइन कोठा खुल गया है जिसे कभी राजा महाराजा, मुग़ल, जमींदार लोग देखने के लिए जाया करते थे।

Striya azad hui तो इंटरनेट पे जिस्म की नुमाईएश करने लगि है उसे तो देख कर यही सही लगता है की समाज क्यूं इन्हें घरों में रखता था। क्यों औरतों पे घुंघट की पाबंदी थी क्यों उन्हें घरो में ही रखा जाता था। कुछ स्त्रियां आजाद क्या हुई परिवार के बंधनों से वे क्या पहनना है क्या ग़लत है क्या सही हैं सब भूल गयी। सिर्फ अपने जिस्म को कैमरे के सामने अलग अलग अंदाज़ में दिखा रही हैं मॉर्डन कल्चर के नाम पे। रोज के रोज जितने हो सके उतने छोटे कपड़े पहन रही हैं और इंटरनेट पे नाच रहीं है या ऊ कहे तो डांस।

Striya azad hui to kapde hi uttar diye

Striya azad hui to pata chala samaj kyu inhe gharo me rakhta tha
Striya azad hui to pata chala samaj kyu inhe gharo me rakhta tha

डांस भी कैसा जिसमे सिर्फ अंग प्रदर्शन किया जा हैं शरीर के हर अंग को दिखया जा रहा है फूहड़ गानों पे। जिन छातियों को ढक के रखना चाहिये उन्हें हर उम्र की लड़कियाँ, महिलाएं आज खोल खोल के दिखा रही है। स्त्रियां आजाद हुई तो इंटरनेट पे फेमस होने के लिए, नाम बनाने के लिए, फैन फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए रोज का रोज अपने बदन को दिखाएँ जा रहे हैं।

पहले ये नग्न्ता सिर्फ फिल्मों में ही हुआ करती थी पर अब ये फिल्मों के बाहर भी होने लग गया, आप कही भी देखें रास्ते, ट्रेन, बस, गार्डेन और किसी भी धार्म्मिक जगह सब जगह ऐसे प्रवत्ति वाले लोग मिल जायँगे जो बिना सकुचाए कामक्रीड़ा, अश्लीलता, प्यार का नंगा नाच करते हुए और विडियो बनाते हुए आप को मिल जाएंगे।

समाज का अधिकांश वर्ग अब कामुक्ता के ओर बढ़ रहा है वह हर समय सिर्फ कामुक्ता, सेक्स की बातें सोच हैं। ज्यादा तर इन्टरनेट का यूज़ सिर्फ सेक्स वीडियो, कम कपड़ों वाली लड़कियों, महिलाओं की तस्वीरों, और सेक्स से भरी फिल्मों को देखने में यूज़ हो रहा है। एक वर्ग ये सब देखें जा रहा है और दुसरा वर्ग दिखाए जा रहा है।  

इन सब बातों से हम या कोई भी यह कह सकता है की “स्त्रियां आजाद हुई तो पता चला समाज क्यू इन्हें घरों में रखता था”

*मेरी राय:- जितना किसी समाज में महिलाओं के शरीर से पर्दा उठता है उतना ही सामाजिक पतन होता है।


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