Khaalipaper.com

हिंदी कहानी संग्रह कथा स्टोरी | प्रेरणादायक हिंदी कहानी | Hindi story

Lifestyle

Safalta kya hai aur safalta kaise prapt kare?

Safalta kya hai aur safalta kaise prapt kare? सफलता, एक ऐसा शब्द जो हमारी इच्छाओ को जगाकर, हमारे अन्दर दृढ़ संकल्प को प्रज्वलित करता है, और हमें अपनी क्षमता की सीमा से अधिक आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा देता है।

सफलता क्या है? और सफलता कैसे प्राप्त करे?

Introduction / परिचय:

सफलता किसी मंजिल का नाम नहीं है। सफलता एक यात्रा है। यह सीखने, विकास करने और बन्धनों पर काबू पाने की एक प्रक्रिया है। इस ब्लॉग में, हम उन मूलभूत सिद्धांतों और नियमो के बारे में बाते करेंगे जो सफलता प्प्राप्त करने में हमारी सहायता करेंगे। और हमारे सपनों को हकीकत में बदलने के लिए उन्हें हमारे जीवन में कैसे एकीकृत कर सकते है।

वास्तव में सफलता क्या होती है?

सफलता किसी मंजिल का नाम नहीं है। सफलता एक यात्रा है। यह सीखने, विकास करने और बन्धनों पर काबू पाने की एक प्रक्रिया है। सफलता एक सुखी, समृद्ध ,संतुष्ट और आनंदमय जीवन है।  

Safalta का सही मतलब क्या है?

आज के दौर में लोग सफलता का मतलब सिर्फ आमिर होना ही समझते है। जैसे कि एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी पोस्ट, अच्छा पॅकेज, अच्छा घर, एक सुन्दर पत्नी, बड़ी महँगी गाड़ी, ढेर सारा बैंक बैलेंस, विदेश यात्रा, या फिर एक बहुत बड़ा व्यपार (Bussiness), बंगला, गाड़ी, फार्म हॉउस, नौकर चाकर, खूब मौज मस्ती, AC इसी को ही सफलता समझते है।

सफलता का सही अर्थ या मतलब एक चिंतामुक्त सुखी, समृद्ध ,संतुष्ट और आनंदमय जीवन है। आज के समय में चिंतामुक्त जीवन ही सफलता कि निशानी है। जो कि सरल नहीं है आज के समय में चिंतामुक्त सुखी, समृद्ध ,संतुष्ट और आनंदमय जीवन जीना। इस संसार में जो व्यक्ति संतुष्ट है वह सफल है।

हर व्यक्ति के लिए सफलता का मतलब सिर्फ आमिर होना नहीं होता है। कुछ लोगो का उद्देश्य सिर्फ अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा करना होता है। फिर चाहे उसे उस लक्ष्य को हासिल करने के बाद धन मिले या ना मिले इससे उनको कोई लेना देना नहीं होता है।

दशरथ मांझी “माउंटेन मैन” (14 जनवरी 1934 – 17 अगस्त 2007)

Safalta kya hai - Dashrath Manjhi

जैसे दशरथ मांझी का उदहारण ले लीजिये उन्होंने एक पहाड़ को काटकर रास्ता बनाने का लक्ष्य निश्चित किया और उस लक्ष्य को पूरा किया। इस लक्ष्य को पूरा करने में उन्हें कई वर्षो का समय लगा। और बदले में उन्हें कोई धन कि प्राप्ति नहीं हुई और न ही किसी प्रकार कि सहायता मिली।

लेकिन फिर भी वे रुके नहीं लगातार अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए मेहनत करते रहे और पहाड़ को अकेले ही काटकर रास्ता बना दिया। जो कि आसान नहीं था एक अकेले आदमी के लिए इतना बड़ा पहाड़ काटना।

यदि दशरथ मांझी लगातार पहाड़ को काटने का काम नही करते या बीच में आराम करने या कुछ दिन करके छोड़ देते तो वे अपना लक्ष्य कभी भी हासिल नहीं कर पाते। वे लगातार अपने लक्ष्य कि ओर बढ़ते रहे। उन्होंने अपना हर कदम सिर्फ अपने लक्ष्य कि ओर बढ़ाया और अंत में लक्ष्य हासिल किया।

सफलता कैसे हासिल कि जा सकती है?

अपने जीवन में अपना एक निश्चित लक्ष्य निर्धारित करे। उस लक्ष्य को पेपर पर लिख अपने घर के किसी दिवार पर चिपका दे जिससे वह लक्ष्य हमेशा आपके दीखता रहे। जिससे आपको आपका लक्ष्य हमेशा याद रहे। अपने पुरे शरीर को उस एक लक्ष्य से भर दो और अन्य दुसरे सभी विचारो को अपने जीवन से निकल दो। इस तरह से सफलता हासिल कि जा सकती है। यही सफलता कि कुंजी है।

सफलता हासिल करने का सही मार्ग क्या है?

सफलता हासिल करने के लिए हमें हमेशा अपने निर्धारित लक्ष्य कि तरफ बढ़ते रहना चाहिए। हमेशा अपने लक्ष्य के बारे में ही सोचना चाहिए। लक्ष्य कि ओर बढ़ने के नए नए तरीके ढूंढने चाहिए। हमें अपना एक भी पल बर्बाद नहीं करना चाहिए। लक्ष्य को पाने के लिए सतत प्रयास करते रहना चाहिए।

Safalta पाने के लिए क्या क्या उपाय करने चाहिए?

सफलता पाने के लिए सबसे पहले अपना एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उस लक्ष्य को पाने के लिए किस तरह कि मुश्किले आयेंगी उसके समाधान निकलना चाहिए। अपने लक्ष्य के अलावा अन्य किसी भी बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए। हमेशा अपने लक्ष्य के बारे में ही सोचना चाहिए। लक्ष्य कि ओर बढ़ने के नए नए तरीके ढूंढने चाहिए। हमें अपना एक भी पल बर्बाद नहीं करना चाहिए। लक्ष्य को पाने के लिए सतत प्रयास करते रहना चाहिए।

सफलता पाने के लिए किस तरह से मेहनत करना चाहिए?

अपने जीवन में सफलता पाने के लिए नियम बनाये ये सबसे पहला कदम है सफलता कि ओर।
जल्दी सोना और जल्दी उठना
अपना एक निश्चित और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करे।
अपने जीवन को उस एक लक्ष्य से भर दो।
अपने लक्ष्य के अलावा दुसरे विचारो को अपने जीवन से निकल दो।
अपने लक्ष्य को पाने के लिए जुनून और उद्देश्य को अपनाना।
अपने अन्दर विकास की मानसिकता विकसित करना।
हमेशा सीखते रहना।
समय का सही से इस्तमाल करना।
अपने लक्ष्य के लिए दृढ़ता और दृढ़ संकल्प ले।
अपना ध्यान हमेशा अपने लक्ष्य पर लगाये रखो।
अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर से भटकने मत दो।
हमेशा अपने लक्ष्य के बारे में सोचो।
लक्ष्य के रास्ते में आने वाली मुश्किलों का समाधान निकालो।
दुसरे अनुभवी से अपने लक्ष्य के लिए सलाह ले।
अपने लक्ष्य कि ओर लगातार बढ़ते रहो।
सफलता के सूत्र

Safalta kya hai aur safalta kaise prapt kare? आइये इस सफलता के बारे में और विस्तार से एक कहानी के माध्यम से समझते है। इस कहानी के माध्यम से सफलता प्राप्त करने में सहायता मिलेगी, और सफलता प्राप्त करना आसान हो जायेगा। यह कहानी बचपन में स्कूल के दिनों में हम सबने सुनी होगी।

इस कहानी का नाम है, “कछुआ और खरगोश कि दौड़”। दरसल इस कहानी को स्कूल के समय में हम उतने अच्छे से नहीं समाझ पाए। इस कहानी का सही मतलब तो अब जाकर समझ में आ रहा है कि कैसे एक बहुत ही धीमी गति से चलने वाला कछुआ भी एक बहुत तेज गति से दौड़ने वाले खरगोश से जीत कर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हुआ।

कछुआ और खरगोश की कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

इस कहानी में हम देखते है कि, जब कछुआ और खरगोश कि रेस सुरु होती है तब खरगोश बहुत तेज गति से दौड़ता है और कछुए से बहुत आगे निकल जाता है कुछ दूर जाने के बाद पीछे मुड़कर देखता है कि कछुआ उसे दूर दूर तक कही नज़र नहीं आता है, तब वह खरगोश सोचता है कि कछुआ तो बहुत पीछे छुट गया है।

कछुए को आने में अभी बहुत वक्त लगेगा, मै तो कछुए से बहुत आगे हुँ और रेस तो मै ही जीतूँगा। जब तक कछुआ मेरे निकट आएगा तब तक मै खा कर थोडा आराम कर लेता हु। यह सोचकर खरगोश घास खाता है और एक पेड़ के निचे आराम करने के लिए बैठ जाता है और थोड़ी ही देर में खरगोश कि आँख लग जाती है और खरगोश गहरी नींद में सो जाता है।

कछुआ जानता है कि उसकी चलने गति खरगोश के मुकाबले में बहुत ही धीमी है। कछुए का खरगोश से रेस जितना लगभग नामुमकिन ही है। लेकिन कछुए ने अपनी धीमी गति से चलना जारी रखा। अपना हर कदम अपने लक्ष्य कि ओर बढाता रहा।

कछुए ने अपनी तुलना खरगोश से नही कि कि वह इतनी तेज गति से दौड़ने वाले खरगोश से कैसे जीतेगा और न ही कछुए ने अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर से भटकने दिया, और न ही अपना समय बर्बाद किया। कछुआ लगातार अपने लक्ष्य कि ओर बढ़ता रहा, और अपना लक्ष्य हासिल किया।

इसी तरह हमें भी सफलता पाने के लिए लगातार अपने निर्धारित लक्ष्य कि ओर बढ़ते रहना चाहिए, बिना एक भी क्षण बर्बाद किये। लक्ष्य जब तक हासिल न तब तक बिना थके लगे रहे। एक न एक दिन लक्ष्य जरुर प्राप्त होगा।

निष्कर्ष:

Safalta kya hai aur safalta kaise prapt kare? सफलता कोई मंजिल का नाम नहीं है। यह एक ऐसी यात्रा है जिसमें समर्पण, लचीलापन और निरंतर विकास की आवश्यकता होती है। जिसमे आप अपने दृष्टिकोण को परिभाषित करके, विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित करके, चुनौतियों को स्वीकार करके और एक मजबूत समर्थन नेटवर्क बनाकर, आप सफलता के लिए खुद को तैयार करते हैं।

याद रखें कि प्रत्येक विफलता एक सीढ़ी है, और लचीला बने रहने से आपको अप्रत्याशित रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। जैसे ही आप सफलता की राह पर आगे बढ़ें, प्रक्रिया को संजोएं और अपने दृढ़ संकल्प को महानता की ओर ले जाएं।


ऐसे ही आर्टिकल के लिए हमारे Facebook पेज को फॉलो करें।