रेडीमेड - यहाँ संघर्ष के बिना कुछ नहीं मिलता

14 February, 2020
without hard work there is no success

इस धरती पर तो भगवान् को भी संघर्ष करना पड़ा है।

दोस्तों रेडीमेड का हिंदी में मतलब होता ही कि बना बनाया, बना हुआ या तैयार। यहाँ जीवन के बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे का वर्णन कर रहा हूँ। यह एक मोटिवेशन (motivation) है कोई कहानी नहीं। जीवन कि सच्चाई है। ये उन लोगो के लिए है जो अपने जीवन से काफी परेशान रहते है और चुनौतियों का सामना नहीं कर पाते उन्हें सबकुछ रेडीमेड चाहिए।

वे हमेशा दूसरो को ही देखते है कि अन्य लोगो के पास वो सबकुछ है जो उनके पास नहीं है। वे हमेशा अपनी तुलना दुसरो से करते है और परेशान रहते है। अपनी जीवन कि चुनौतियों को सुलझाते नहीं बल्कि उसमे उलझ जाते है और जल्द ही हार मान लेते है। वे मेहनत नहीं करना चाहते या फिर कोशिश नहीं करते सबकुछ उन्हें घर बैठे(comfort zone) ही मिल जाये ऐसा सोचते है। वे ये नहीं समझते है कि परिस्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती परिस्थिति हमेशा बदलती रहती है हमें परिस्थिति को अपने अनुसार अनुकूल बनाना पड़ता है।

अपने जीवन काल में सभी को प्रतिदिन के २४ घंटे ही मिलते है अपनी जीवन को बेहतर बनाने के लिए, फिर चाहे वो इस पृथ्वी का कोई भी मनुष्य हो ये उस व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह इन २४ घंटो का इस्तेमाल कैसे करता है। कोई इन 24 घंटो में अरबो रूपये कमाता है तो कोई करोड़ो तो कोई लाखो तो कोई हजारो।

तो कोई अपना जीवन सिर्फ दुसरो कि गलती निकलने में बिता देता है तो कोई दुनिया को कोसने में तो कोई अपने आप से ही दुखी रहता है। तो कोई सरकार को दोष देता है सरकार जो जिम्मेदार ठहरता है अपनी नाकामी छुपाने क लिए। सबकी अपनी अपनी मेहनत बुद्धि का और सोच पर निर्भर करता है कि उसे क्या करना है और कैसे करना है। कैसे जीवन जीना है ? और जीवन मिला है तो जीना ही पड़ेगा फिर चाहे हस के जियो या रो कर तो क्यू न हम जीवन हस कर जिए।

यहाँ इस धरती पर तो भगवान् को भी संघर्ष करना पड़ा है उनका जीवन भी आसान नहीं रहा है। और उन्होंने ने संघर्ष किया इसलिए वे आज भगवान् कहलाते है। बिना संघर्षो के कोई महान नहीं बनता। जब भगवान को भी इस धरती पर संघर्ष करना पड़ा है भला हम कैसे इससे बच सकते है हम तो केवल एक मामूली से इंसान है। अगर महान बनना है तो कुछ करके दिखना होगा।

जिंदगी तो सभी कि कट जाती है लेकिन जिंदगी वही जीते है जो कुछ कर दिखाते है। जिंदगी जीने में और काटने में बहुत अंतर होता है। हकीकत में देखा जाये तो यहाँ इस धरती पर पंचतत्वो के अलावा कुछ भी रेडीमेड नहीं है। यह धरती और सबकुछ इन पंचतत्वो से बनी है पंचतत्व का मतलब है इन पांच तत्व से है। धरती, जल, वायु, अग्नि और आकाश ये ५ तत्व है इनसे से इस प्रकृति का निर्माण हुआ है और इसी में इसी में मिल जाता है। इस धरती पर जो कुछ भी हमारे आस पास है सब मानव निर्मित है वो सब किसी न किसी मनुष्य ने ही बनाया है। और जहा अकेले बनाना संभव नहीं होता वह मिलकर बनाया जाता है।

जिस मकान में हम रहते है जिस रस्ते पर चलते है ये सब किसी न किसी ने तो बनाया ही है। हमारे पास दुनिया के सात अजूबे है जो किसी न किसी ने बनाया ही है। और जिसे भी बना हुआ या तैयार रेडीमेड मिला है वो भी किसी न किसी ने तो बनाया ही होगा न किसी न किसी ने उसके लिए संघर्ष किया होगा मेहनत कि होगी। जैसे कुछ लोगो धन और जमीन विरासत में मिलती है लेकिन उसके लिए भी तो किसी न किसी उनके पूर्वजो ने मेहनत और संघर्ष(hard work) किया होगा।

Success is not final, failure is not fatal

जिस प्रकार हम आज के दौर में कोई गेम(game) खेलते है तो देखते है कि उसमे कई पड़ाव(leval) होते है। पहला पड़ाव आसान होता है दूसरा थोडा कठिन तीसरा थोडा कठिन फिर जैसे जैसे पड़ाव पर आगे बढ़ते चले जाते है वैसे वैसे पड़ाव कठिन होते चले जाते है और एक पड़ाव को पार किये बिना दुसरे पड़ाव में नहीं जा सकते है। जीवन में भी उसी प्रकार पड़ाव आते रहते है और हमें उस पड़ाव को पार करके आगे बढ़ते रहना चाहिये।

जो मजा अपने दम पर सफल बनने में है वो मजा करोड़ो कि खानदानी दौलत में नहीं है।

- RAKESH PAL