कड़वा सच : बेटी और बहु में फर्कं

14 August, 2020
Beti aur bahu me antar

सदियों से चली आ रही है सास-बहू की नोक झोंक

इसे भारत का दुर्भाग्‍य ही कहेंगे कि आज भी आने वाली बहू को वो सम्‍मान नहीं मिलता जिसकी वो हकदार होती है। आप भी ये जानते है की सदियों से चली आ रही है सास-बहू की नोक झोंक।

कभी बहू अच्छी नहीं मिलती है तो कभी सास और कभी परिवार ही अच्छा नहीं मिलता है। ये भारत में सदियों से चली आ रही एक प्रथा जैसी हो गयी है। बेटी कभी बहू बनती है कभी माँ और फिर सास भी ये चक्र चलता ही रहता है फिर भी सवाल ये है की सास-बहू में अनबन होती क्यों है?

आज बात २१ सदी की बहू और बेटियों में अन्तर की है अकसर ये देखा जाता है की बहू और बेटियों में बहुत ही भेधभाव किया जाता है। बेटियों को जिस तरह की आजादी मिलती है वो बहुओं को नहीं मिलती है, बेटियों को खुली आजादी है कुछ भी पहनने की, कही भी जाने की और किसी के भी साथ घूमने की। कोई उनसे ये नहीं पूछता है कहा जा रही है वे, किसके साथ घूमती फिरती है और क्या करती है? आज कल पढ़ाई के नाम पर ना तो घर का काम सिखाते है और ना ही करते है। पढ़ा लिखा कर बस अच्छी जगह शादी करवा देना चाहते है।

ये वही समाज के लोग है जो अपनी बेटी को अच्छी लाइफ देना चाहते है और दूसरी तरफ सारी उम्मीदे बहू से ही लगाए रहते है। बहू हद में रहे ये चाहते है कभी ऊंची आवाज़ में बात न करें, घर का सारा काम करे वो भी टाइम तो टाइम। बहू क्या पहनती है इसपर ही घर वालो नज़र रहती है। बहू क्या करती है? कहा जाती है? किस से बात है? ये सारी बाते जाननी होती है।

इन्हे तो अपनी बेटी की कोई भी गलत बाते और आदतें दिखाई नहीं देती है, बेटी कुछ ना करे तो चल जाता है पर बहू ना करे तो फिर सारा घर सर पे उठा लेते है दुनिया भर से बहू की शिकायते करते फिरते है। बहू के घर वालों तक को घसीट लेते है। ऐसे दोगले परिवार बहोत है आज, जो अपनी हरकतों को तो छुपाते है और बहू की तो बड़ा चढ़ा कर दुनिया वालो के सामने बताते, कहते है बहू ने घर बिगड़ दिया उनकी जिंदगी नरक बना दी है जबकि वे ये नहीं सोचते है की किसने किस की जिंदगी बर्बाद कर दी है।

वे यह नहीं सोचते है की उनकी बेटी भी तो किसी के घर की बहु बनेगी और जो उनकी बहु है वह भी तो किसी की बेटी है और उनकी बेटी की उम्र एक समान ही है उसके माँ बाप भी तो यही सोचते होंगे जैसा की एक सास अपनी बेटी और दामाद के बारे में सोचते है लोग अगर अपनी सोच नहीं बदलेंगे तो यह सिलसिला इसी तरह चलता रहेगा सास सास ही रहेगी और बहु बहु ही रहेगी और परिवार टूटते रहेंगे अलग होते रहेंगे।

सभी को अपना जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए. ज्यादातर घरों में बेटियों का ही राज चलता है फिर चाहे वो अपने मायके में हो या अपने ससुराल में वो अपना अधिकार बनाये रखती है अपना हुकुम चलती है जिसके कारण परिवार में झगडे होते है और परिवार बिखर जाता है फिर भी इक्कीसवी सदी की माँ को अपनी बेटी की गलती दिखाई नहीं देती है। खुद की बारी आती है तो बहु बुरी है और बेटी की बारी आती है तो बेटी के सास ससुर बुरे है बेटी का ससुराल बुरा है।

ऐसा बताते है ये वही बात हो गई की चित्त भी अपना पट्ट भी अपना और यही चल भी रहा है कोई भी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है जिसकी वजह से रोज घर में झगड़े होते रहते है और अंत में परिवार बट जाता है। इसमें सारा दोस माँ का होता है जो अपनी बहु को अपना परिवार अपनी बेटी न मानकर एक नौकरानी समझती है अपना हुकुम चलती है सिर्फ काम करने वाली मशीन दिखती है उनके साथ बात करने में मिलकर रहने मे हसने बोलने में अपनी बेज्जती समझती है।

- RAKESH PAL