बदलते रिश्तो की दास्तान | मतलबी रिश्ते

July 05, 2020
Badalte rishton ki dastaan

कब आपको अपने ही किस मोड़ पे धोखा दे दे, ये आप सोच नहीं सकतें।

ये कहानी हमारे सोसाइटी में रहने वाले एक व्यक्ति कि है। जिनको मै बचपन से अपने सोसाइटी में रहते देख रहा हूँ। एक ही सोसाइटी में रहते रहते मै उनको अच्छे से जनता हु। मेरा और उनका मिलना जुलना भी होता है। जो अब बूढ़े हो चुके है, ये बात पच्चीस साल पहले कि जब वह व्यक्ति गाव से अपने बड़े भाई के पास मुंबई रहने के लिए आये थे। उनके बड़े भाई अपने परिवार के साथ मुंबई में रहते थे जिसमे उनकी पत्नी और दो बेटे थे। दोनों बेटो कि उम्र पांच छह साल के आस पास ही थी।

कम पढ़ा लिखें होने कि वजह से उस व्यक्ति को कोई अच्छी नौकरी नहीं मिल रही थी। बहुत कोशिश किया उन्होंने लेकिन उन्हें कोई भी नौकरी नहीं मिली और कई महीने बित गए। उनके पास जो भी पैसे थे वो भी ख़तम हो ने लगे फिर उन्होंने हिम्मत करके मुंबई की एक सड़क के किनारे बैठकर बेल्ट और पर्स बेचने का व्यापार सुरु किया। धीरे धीरे उनका सड़क पर बेल्ट और पर्स बेचने का व्यापार चलने लगा और वो उसी काम में व्यस्त हो गए और उसी को अपना काम बना लिया। अब समय अच्छा बित रहा था उनकी जीवन कि गाड़ी पटरी पर आ गयी थी।

कुछ साल के बाद उनके बड़े भाई का देहांत हो गया। अब बड़े भाई के परिवार कि जिम्मेदारी इनके कंधो पर आ गयी। इनके व्यापार से इतनी आमदनी नहीं होती थी कि जिससे वो मुंबई जैसे शहर में अपने लिए कोई निजी घर ले सके। उनके पास भी कोई और रास्ता नहीं था और बड़े भाई के परिवार जिम्मेदारी भी थी, इसलिए वे बड़े भाई के परिवार को अपनी जिम्मेदारी समजकर अच्छे से निभाने लगे, लेकिन उनकी भाभी भी जादा दिन तक नहीं रुकी वो अपने बच्चो को छोड़कर चली गयी और दूसरी शादी करी ली।

अब उन दोनों बच्चो का इनके सिवा और कोई नहीं था और बच्चे भी छोटे थे स्कूल भी जाने लगे थे। उनके लिए अकेले बच्चो को संभालना स्कूल ले जाना बड़ा मुश्किल हो रहा था। इसलिए उन्होंने अपनी शादी करने का फैसला लिया जिससे कि उन दोनों बच्चो कि अच्छे से देखभाल हो सके। और शादी करके अपनी पत्नी को भी मुंबई में ले आये और अपने भाई के घर में उन दोनों बच्चो के साथ हसी खुसी से रहने लगे।

कुछ समय बाद उनके घर एक बेटी पैदा हुई और कुछ समय के बाद उनको एक और बेटी पैदा हुई,और समय बीतता गया। अब उनके भाई के दोनों बेटे और बड़े हो गयेउन्होंने अपने भतीजो को उच्च शिक्षा दिलाई। जिसके लिए उन्होंने अपनी पूरी आमदनी भी लगा दी और अपने लिए कुछ भी नहीं रखा। यहाँ तक कि उन्होंने अपने लिए कोई निजी घर भी नहीं लिया यह जानते हुए भी कि जिस घर में वो रह रहे है वो उनके बड़े भाई का घर है।

पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके दोनों भतीजे नौकरी करने लगे। कुछ सालो के बाद उन्होंने अपने दोनों भतीजो कि शादी करवा दिया और उसके बाद अपने दोनों बेटियों कि भी शादी करवा दी और वो भी अपने घर चली गयी। यह सब करने क बाद उनके पास कुछ भी बचत नहीं रह गयी। अब उनके दोनों हाथ खली हो चुके थे और बूढ़े हो गए, वो तो ये सोच रहे थे कि वो अपने भतीजो के साथ अब आराम से रहेंगे और अपना जीवन व्यतीत करेंगे।

उनको क्या पता जिनको वे अपना मानकर निश्चिन्त थे कि उनका बुढ़ापा आराम से कटेगा उनके साथ लेकिन उनके भतीजो के मन में तो कुछ और ही चल रहा था। लेकिन वो कहते है न कि जिंदगी में हम जैसा सोचते है वैसा होता नहीं। उनके साथ भी कुछ वैसा ही हुआ उनके भतीजे जो अब कमा रहे थे वे सिर्फ अपना फायदा देख रहे थे वे अपने चाचा से पिछा छुड़ाना चाह रहे थे और वे जानते थे कि जिस घर में वो रहते है वो घर उनके पिताजी का है उनके चाचा का नहीं।

उन्होंने एक तरकीब निकाली अपने चाचा से पीछा छुड़वाने कि, उन्होंने अपने चाचा से कहा कि चाचा अब हमारा परिवार बड़ा हो गया है हमें बड़े घर कि जरुरत है क्यों न हम बड़ा घर खरीद ले। चाचा ने कहा ठीक है खरीद लो बड़ा घर फिर उनके भतीजो ने कहा कि बड़ा घर लेने के लिए उनके पास अधिक पैसे नहीं है क्यों न हम इसी घर को बेच कर और बाकि पैसे बैंक से कर्ज लेकर बड़ा घर खरीद लेते है।

फिर उनके भतीजो ने उनको कुछ महीनो तक कई जगह ले जा कर अलग अलग जगह घर दिखाए। पुराना घर बेच दिया गया और किराये का घर ले लिया उसमे रहने लगे और चाचा से कहा कि कुछ दिनों की बात है नया घर लेते ही हम उसमे चले जायेंगे। अपने लिए कही दूर उनके भतीजो ने घर ले लिया था, और एक दिन अचानक से चाचा को बिना बताये ये लोग अपने नए घर चले गए और अपने चाचा को अकेला और असहाय छोड़कर। फिर चाचा अकेले रह गए उन्हें बहुत दुःख हुआ।

अब वो इस अवस्था में कहा और किसके पास जाये। इस कलयुग में किसी का कोई भरोसा नहीं है कोई कब दगा दे दे।

- RAKESH PAL