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Atma ki shanti | “आत्मा की शान्ति – मन की शान्ति”

“आत्मा की शान्ति” सूनने में तो यह शब्द बहुत छोटा लगता है लेकिन इसका अर्थ बहुत बड़ा और गहरा है। जो इसका अर्थ समझ गया उसकी जिंदगी आसान हो जाएगी। वह अपना जीवन अच्छे से व्यतीत कर लेगा, सुखी जीवन का आनंद ले सकेगा और जीवन में तरक्की भी करेगा। आत्मा कि शान्ति का मतलब यहाँ मन कि शान्ति से है। इसपर एक कहावत भी है।

यदि आपका मन संतुष्ट है, आपके मन में सतोष है तब आपको कठौती में भी गंगा नज़र आएगी अन्यथा आपको गंगा नदी में जाकर भी गंगा के दर्शन नहीं होंगे। जिसके मन में संतोष है, धीरज है उसका मन उसके वश में है वह अपने जीवन को सुखमय तरीके से जीवन का आनंद लेते हुए व्यतीत कर सकता है, अन्यथा वह पूरी जीवनकाल में परेशान रहेगा यह जीवन उसे हमेशा कष्टों से भरा नजर आयेगा और वह यहाँ वहा सुख के चक्कर मे भटकता रहेगा।

सुख कि प्राप्ति के लिए वह अधर्म के मार्ग पर चला जायेगा या ज्यादा सुख के लालच में या जल्दी से सुख प्राप्त हो जाये इसलिए वह गलत रास्ते पर चला जाता है और अधर्म करने लगता है।

आत्मा की शान्ति के धैर्य, संतोष, मन पर काबू करना होता है।

आत्मा कि शान्ति के लिए कार्य करना जरुरी है। इसलिए हमें प्रतिदिन थोडा समय निकाल कर अपने लिए मनन और चिंतन करना चाहिए कि जो कार्य हम कर रहे है वह हमें कहा ले जा रहे है? हम जो कर रहे है वह सही है या नहीं इसका भी ध्यान रखना चाहिए। अच्छे और बुरे कार्यो का चयन ही हमारे जीवन को निर्धारित करता है। इसका असर हमारे पुरे परिवार पर भी पड़ता है। हमारे बच्चे भी वही सब सीखते है इसलिए हमेशा अपने आचरण को सही रखना चाहिए।

इसलिए आपने मन को काबू से रखना बहुत जरुरी है। हमारे जो भी सपने है उनको मन में रखते हुए धीरे धीरे उसे पूरा करना चाहिए लेकिन उसके लिए कभी गलत रस्ते पर नहीं जाना चाहिए, कोई अधर्म नहीं करना चाहिए। हमारे वजह से किसी को कष्ट न पहुचे इसका भी ध्यान रखना चाहिए।

Atma ki shanti – “ मन चंगा तो कठौती में गंगा ”

जिस भी मनुष्य ने अपने मन पर क़ाबू पा लिया उसमे अपने आप सतोष और संतुष्टि की भावना जाग जाएगी और वह मनुष्य सुख – शांति, समृद्वि की ओर अग्रसर हो जाये गए। वह मनुष्य चिंता से मुख्त हो सकता है, उसे मान – अपमान की कोई चिंता नहीं रहेगीं। दुःख – सुख उसके लिए सामान रूप से होंगे। वह जो भी काम करेगा उसमे उसे शांति मिलेगी, सतोष और संतुष्टि के कारण वह व्यक्ति अपने जीवन को धर्म – कर्म के द्वारा ब्यतीत कर सकेगा।

जिस तरह से जन्म और मृत्यु सत्य है उसी प्रकार से आत्मा की शान्ति के धैर्य, संतोष, मन पर काबू करना भी उतना ही सत्य है।


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