“आत्महत्या” करना सही है या गलत?

1 August, 2020
Aatmhatya sahi ya galat

जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। आत्महत्या कोई हल नहीं है।

आजकल जैसे कि आत्महत्या का एक दौर सा चल पड़ा है हर दुसरे तीसरे दिन किसी न किसी के आत्महत्या करने कि खबर आती रहती है। अब जैसे हाल ही में अभिनेता शुशांत सिंह राजपूत(Sushant Singh Rajput) कि आत्महत्या कि खबर आई। सुनकर बड़ा ही दुःख होता है कि लोग आत्महत्या जैसा बड़ा फैसला इतनी आसानी से कैसे ले लेते है।

आत्महत्या एक अपराध है। जीवन बड़ा ही अनमोल है। ईश्वर का दिया हुआ अनमोल उपहार है जीवन। हमारे वेद और पुराणों के अनुसार मानव जीवन चौरासी लाख(84 Lac) योनियो में भटकने के बाद एक बार मिलती है। ईश्वर कि प्रत्येक रचना अपने आप में सर्वश्रेष्ठ है।

मानव जीवन कि रचना सबसे सर्वश्रेष्ठ है इन सब रचनाओं में। इसे इस तरह आत्महत्या करके व्यर्थ न करे। समस्या किसके जीवन में नहीं आती? हमारे यहाँ तो भगवान् को भी अनेको समस्यायों का सामना करना पड़ा है, भगवान् का जीवन भी आसान नहीं रहा, समस्यायों पर विजय हासिल करने के कारण ही वो भगवान् कहलाते है। तो हमने यह कैसे सोच लिया कि हमारे जीवन में समस्याए नहीं आएँगी।

सच तो यह है कि समस्यायों का सामना करके ही लोग महान बनते है। समस्याए तो आती जाती रहेंगी हमें समस्यायों से घबराना नहीं है उन समस्यायों का सामना करना है और जीवन में आगे बढना है। समस्या को किस रूप में लेना है, समस्या या अवसर? यह प्रत्येक व्यक्ति के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। यह आज के इस आधुनिक युग में लोग अज्ञानता के कारण तुरंत जीवन की समस्यायों से हार मान कर आत्महत्या कर लेते है, जबकि ये बिलकुल गलत है।

अपने जीवन कि समस्या को अपने घरवालो तथा मित्रो के साथ साझा करे कोई न कोई हल जरुर निकलेगा। सुख दुःख तो प्रकृति का नियम है। इससे कोई भी नहीं बच पाया है। तो भला हम कैसे बच सकते है सुख दुःख के इस चक्कर से। सुख दुःख जीवन के दो पहलु है। जिस प्रकार दिन और रात है। दिन के बाद रात आती है और रात के बाद दिन इसी प्रकार सुख आता है और सुख के बाद दुःख फिर दुःख के बाद सुख यह जीवन का चक्र है यह निरंतर ऐसे ही चलता रहेगा। जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है।

“nothing is impossible“ डर के आगे जीत है। एक रास्ता बंद होता है तो ईश्वर दूसरा रास्ता खोल देते है बस कोशिस करने कि देरी होती है। लेकिन आजकल लोगो में सब्र नहीं है। वो तो जाते ही है दुनिया से आत्महत्या करके लेकिन अपने साथ अपने पुरे परिवर को गम के अँधेरे में छोड़ कर चले जाते है। अपने परिवर जनो को दुखी कर जाते है अपने बच्चों को बेसहारा छोड़ कर चले जाते है। उनके जीवन पे उनका ही अधिकार ही नहीं होता है बल्कि उनके आलावा उनके घर वालों का, सगे संबंधी, दोस्तों का भी अधिकार होता हैं। उनके जाने के बाद उनके परिवार वालो का क्या होगा वे इस बारे में जरा भी नहीं सोचते है।

इसीलिए यह सब देखकर आजकल माँ बाप ने भी अपने बच्चो को डाटना छोड़ दिया है कि कही उनका बेटा या बेटी गुस्से में आकर कही आत्महत्या न कर ले। आत्महत्या कोई हल नहीं है। अपने जीवन का अंत कर लेने से समस्यायों का अंत नहीं होता बल्कि उनके परिवार वालो कि समस्याए और बढ़ जाती है। इसलिए कोई भी आत्महत्या(Suicide) करने कि ना सोचे बल्कि अपने समस्याओ परिवार के अन्य लोगो से साझा करे अपने घर के बड़ो कि राय लेकर काम करे।

जीवन में एक बार सभी को श्रीमद भगवदगीता पढ़नी चाहिए जीवन के सभी प्रशनो का हल दिया गया है और यह सत्य पर आधारित है और यह सभी मनुष्य के जीवन पर आश्रित हैं। भगवदगीता यह एक प्रेरणा का स्रोत है।

- RAKESH PAL