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Ek nadi ka rahasya | अनसुलझा एक नदी का रहस्य सुलझाने की कोशिश

एक नदी जो जंगल के रस्ते बहते हुए एक पहाड़ के पास एक बड़े से दरार में जाकर ख़तम होती थी। उस दरार में जाने के बाद नदी का पानी कहा जाकर निकलता है यह किसी को पता नहीं था।

कुछ वैज्ञानिको ने नदी का यह रहे रहस्य पता करने कि सोची और सब ने एक टीम बनायीं और सभी अपने सभी उपकरण लेकर नदी के अंतिम छोर का पता करने के लिए पहाड़ के उस दरार के पास पहुच गए। उनकी टीम में बारह लोग थे बारह लोगो में से चार लोग ऊपर रुकते है और आठ लोग निचे दरार के अन्दर जाते है और अपनी खोज सुरु करते है। दरार के अन्दर जाने के बाद निचे उन लोगो को एक बड़ी गुफा दिखती है नदी का पानी उस गुफा से बहते हुए आगे जा रहा था।

वे दरार के गुफा के बाहर अपना उपकरण लगाकर अपनी खोज में जुट जाते है कुछ घंटे बीतने के बाद अचानक मौसम बहुत खराब हो जाता है और बहुत जोर से आन्धि तूफ़ान आता है और बारिस होने लगती है।

ऊपर टीम के चार लोग अपनी जान बचा कर वह से भाग जाते है निचे के टीम के आठ लोग निचे ही रहते है तेज तूफान के कारण एक बड़ा पत्थर ऊपर पहाड़ से सरकता हुआ दरार के ऊपर ही आकर रुक जाता है जिसकी वजह से उन आठ लोगो का दरार के अन्दर से बाहर निकलना संभव नहीं था और उनके पास बहार निकलने के लिए कोई और रास्ता नहीं था अब वे पूरी तरह से अन्दर फस चुके थे उनका संपर्क भी टूट गया था।

अब उनके पास नदी के बहते हुए पानी के साथ गुफा के अन्दर आगे बढ़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं था और बारिस भी बहुत तेज थी जिसकी वजह से गुफा के अन्दर पानी भरने लगा उन सभी ने अपना स्विमिंग शूट फना और ओक्सिजन लगाकर आगे बढ़ने लगे कुछ ही देर में गुफा में पूरा पानी भर गया।

एक अनसुलझा नदी के रहस्य को सुलझाने की कहानी।

गुफा में थोड़ी दूर आगे जाने के बाद रास्ता बहुत संकरा था जिसमे से पार होना थोडा मुस्किल था धीरे धीरे एक एक करके सब संकरे रस्ते से निकल गए लेकिन अंत मे एक सदस्य कि ऑक्सीजन कि पाइप फट जाती है जिससे उसकी पूरी ऑक्सीजन निकल जाती है और वह सदस्य ऑक्सीजन न मिलने कि वजह से मरने लगता है।

तभी दूसरा एक सदस्य उसे अपनी ऑक्सीजन देता है और उसकी जान बचाता है और उससे कहता है कि हम एक दुसरे को ऑक्सीजन बाटते हुए आगे बढ़ेंगे थोड़ी ही दूर आगे जाते ही ऑक्सीजन कि कमी होने लगती है क्योकि सभी के पास एक ही ऑक्सीजन का सिलेंडर था इसलिए कुछ दूर जाने के बाद उस सदस्य ने दुसरे सदस्य को ऑक्सीजन देना बंद कर दिया क्योकि अपनी जान कि चिंता सबको होती है और हर कोई जीना चाहता है। जान है तो जहान है। जिससे उस सदस्य कि मृत्यु हो जाती है जिसकी ऑक्सीजन कि पाइप फट गयी थी।

वहां से सिर्फ सात लोग ही बचते है और आगे जाते है कुछ और आगे जाने के बाद वहां का तापमान एकदम कम हो जाता है जिससे और पानी में भीगे होने कि वजह से ठण्ड और अधिक लगने लगती है जिसके कारण एक और सदस्य कि मृत्यु हो जाती है।

अब टीम में सिर्फ छह लोग बचते है और आगे बढ़ते है और उन सबका ऑक्सीजन भी अब आधा खतम हो चूका था। कई किलोमीटर और आगे जाने के बाद एक खाई दिखी जिसे पार करना कठिन था वे लोग खाई पार करने के लिए रस्सी का सहारा लेते है लेकिन खाई को एक रस्सी के सहारे लटक कर पार करना बहुत कठिन था।

इसमें तिन लोग खाई में गिर जाते है और तिन लोग ही खाई पार कर पाते है और थोड़ी देर आराम करने के बाद आगे कि ओर बढ़ते है और कई घंटो तक आगे जाने के बाद वे तीनो गुफा के अन्दर ही एक सुरक्षित जगह पर पहुच जाते है वहा पहुचने के बाद उन तीनो का ऑक्सीजन ख़तम हो जाता है।

सामने एक बहुत ही बड़ा और गहरा तालाब दीखता है और उस तालाब में सुरज कि रौशनी दिखाई पड़ती लेकिन वो रौशनी काफी दूर थी वहां तक बिना ऑक्सीजन के पहुचना कठिन था। लेकिन और कोई रास्ता भी नहीं था उनके पास कुछ देर आराम करने के बाद उन तीनो ने तालाब में जाने का फैसला किया और तालाब में कूद गए तालाब बहुत बड़ा था कुछ दूर जाने पर ही एक सदस्य कि और मृत्यु हो गयी पानी में डूब के अब सिर्फ वे दो ही थे जो आगे बढ़ रहे थे और कुछ दुरी तय करने के बाद में एक और सदस्य पानी में डूब गया।

अब सिर्फ एक ही आदमी बचा वह अकेले ही था अब लेकिन उसने हार नहीं मानी और पानी में तैरता रहा और सूर्य कि रौशनी जहा से आ रही थी वहां पहुच गया। वहा पहुचने के बाद उसे समुन्द्र दिखा तब उसकी जान में जान आई और वह तैरते हुए समुन्द्र के किनारे पहुच गया। इतने संघर्स के बाद वह जिन्दा बच पाया और अपनी खोज पूरी कि।


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