सुनहरी नदी - Golden River Part 2

September 26, 2020
sunhari nadi

सुनहरी नदी का राजा - खजाने की घाटी

दक्षिण पश्चिम कि हवाये दुबारा कभी उस खजांची घाटी में नहीं गयी उस रात के बाद और न ही कोई और हवाये चली उस घाटी में जिसकी वजह से वहा कभी भी बारिश नहीं हुई। जिसके कारण वहा खेती करना बंद हो गया और पानी के लिए कोई और साधन भी वहा उपलब्ध नहीं था। और वह दोनों भाई भी अब कुछ भी नहीं कमा पा रहे थे उनकी आमदनी पूरी तरह से बंद हो चुकी थी।

उन दोनों शैतान भाइयो ने पैसा कमाने का एक और रास्ता निकला। उन्होंने पैसा कमाने के लिए सोना बेचना सुरु किया। उनके पास जो भी सोने कि सामग्री आभूषण थे उसे उन्होंने एक भट्टी में पिघलाया और उसमे अधिक मात्रा में कॉपर मिलाया और असली सोना बताकर बेच दिया।

हमेशा कि तरह उन्होंने सुरेश से अपने घर का काम करवाते और पूरी कमाई वे अपने ऊपर खर्च करते थे सुरेश को कुछ भी नहीं देते थे और अपने सोने पिघलाने कि भट्टी में भी काम करवाते थे। सुरेश को हमेशा गरीब बनाए रखते थे।

सोने पिघलाने का काम करने से कुछ ही दिनों में घर के सब सोने के सामान और आभूषण ख़तम हो चुके थे सिवाय एक सोने के जग को छोड़कर। वह सोने का जग सुरेश का था वह सोने का जग सुरेश के चाचा ने उसे दिया था जब सुरेश एक छोटा बच्चा था। सुरेश उस सोने के जग से पानी और दूध पिता था।

सुरेश के उन दोनों भाई ने उस जग को देखा उन्होंने उस सोने के जग को पिघलाने कि सोची। लेकिन सुरेश को वह जग बहुत पसंद था सुरेश को उस जग से अत्यधिक लगाव था लेकिन उन दोनों बड़े भाइयो ने सुरेश कि एक भी नहीं सुनी और उस सोने के जग को भट्टी में पिघलाने के लिए डाल दिया और सुरेश से कहा कि जब जग पिघल जाए तब उसमे और सोना डाल देना और इतना कहकर वे वहा से बाहर आ गये।

सुरेश वही बैठा अपने जग को पिघलते हुए देख रहा था, कुछ देर बाद सुरेश को भट्टी में से एक गाने कि आवाज़ आने लगी। सुरेश ने भट्टी में देखा तो उसे उसके बूढ़े दाढ़ी वाले दोस्त का चेहरा दिखाई दिया पिघलते हुए सोने के ऊपर। उसमे से एक आवाज़ आई कि “सुरेश मेरे बेटे आओ मुझे यहाँ से बाहर निकालो मै बहुत गरम हो चुका हूँ। “

सुरेश बहुत ही आश्चर्यचकित था। उसने पिघला हुआ सोना एक पात्र से बहार निकाला और एक बर्तन ने डाल दिया। पिघला हुआ सोना बर्तन में डालते ही एक सोने का बौना सा आदमी प्रकट हुआ उसके चेहरे पर सुरेश के जग का निशान दिख रहा था। उसने कहा कि वह सुनहरी नदी का राजा है और उसने जादू से सुरेश को फिर से उसका सोने का जग वापस दिया। उस बौने आदमी ने सुरेश से कहा कि वह उसे और उसके दुष्ट भाइयो से परिचित है।

फिर उसने सुरेश से एक गुप्त रहस्य कि बात बताई कि यदि कोई भी व्यक्ति पवित्र जल कि तीन बूंदे नदी में डाल देता है पहाड़ी कि चोटी पर जाकर तो यह नदी का पानी उस व्यक्ति के लिए सुनहरा हो जायेगा और कोई भी व्यक्ति इसे सिर्फ एक बार ही कर सकता है। और यदि कोई अपवित्र जल उस नदी में डालता है तो वह व्यक्ति तुरंत काले पत्थर में तब्दील हो जाएगा। इतना कहकर वह बौना आदमी अदृश्य हो गया।

सुरेश ने जब यह बात अपने भाइयो को बताई तब उन्होंने सुरेश कि इस बात पर यकीं नहीं किया और उसे मारा पिटा। लेकीन सुरेश अपनी बात पर अड़ा रहा, कई दिनों के बाद उसके भाइयो ने उसकी बात मान ली और जैसा उस बौने आदमी ने बताया था उसे करने के लिए तैयार हो गये। अब उन दोनों भाइयो में इस बात को लेकर झगडा होने लगा कि पहली कोशिश कौन करेगा सुनहरी नदी में जाने का। उन दोनों में इतना झगड़ा हुआ और मारपीट भी हुई जिसके कारण वहां पुलिस आ गयी। पुलिस को देखते ही रमेश वहा से भाग गया और दिनेश पुलिस के द्वारा पकड़ा गया और दिनेश को जेल में डाल दिया गया।

रमेश खुश नहीं था क्योकि दिनेश जेल में था। अगले दिन सुबह रमेश एक मंदिर में गया और वहां से उसने पवित्र जल चुराया और पहाड़ कि चोटी कि ओर जाने लगा। पहाड़ कि चोटी पर चढ़ना इतना आसान नहीं था। पहाड़ पर थोड़ा ऊपर जाते ही उसे प्यास लग गयी, उसने सोचा कि वह उस पवित्र जल में से थोडा सा जल पी ले। लेकिन जैसे ही उसने पानी पिने के लिए अपना जग ऊपर उठाया उसने देखा कि वहा एक छोटा सा कुत्ता बैठा है और वह बहुत ही प्यासा दिख रहा है ऐसा लग रहा है यदि उसे पानी नहीं मिला तो वह कुत्ता प्यास से मर जायेगा। रमेश ने उस कुत्ते को पानी नहीं पिलाया, खुद थोडा सा पानी पिया और आगे बढ़ गया। उसके आगे कि चढाई और कठिन थी। रमेश को फिर से प्यास लग गयी उसने फिर से पानी पिने के लिए हाथ ऊपर उठा तब उसने देखा कि उसके सामने एक बच्चा पत्थर पर बैठा है वह बहुत तकलीफ में था उसके होठ सुख गये थे और जल रहे थे लेकिन रमेश ने उसे भी अनदेखा कर दिया और थोडा पानी पी लिया और आगे बढ़ गया।

अब इसके आगे कि चढ़ाई अत्यधिक कठिन थी लेकिन किसी तरह रमेश पहाड़ कि चोटी पर पहुच गया जहा से वह सुनहरी नदी कि सुरुआत होती है। वहा उसे एक बेहोश होते हुए आदमी कि आवाज़ सुनाई पड़ी। रमेश ने देखा कि वहा एक बहुत ही कमजोर और बुढा आदमी चट्टान पर लेता हुआ था और पानी पानी चिल्ला रहा था। पानी नहीं मिला तो वह मर जायेगा। रमेश ने कहा कि उसके पास उस बूढ़े आदमी के लिए पानी नहीं है और उस बूढ़े आदमी के उपर से छलांग लगाकर रमेश नदी कि ओर आगे बढ़ गया। सूर्यास्त होने का समय हो चला था सूर्य कि किरणों से नदी का पानी सुनहरा दिखाई देता है। रमेश ने वह पवित्र जल उस नदी में फेक दिया लेकिन नदी का पानी सुनहरा नहीं हुआ और जहा रमेश खडा था वह एक कला पत्थर मौजूद था, और रमेश एक काले चट्टान में परिवर्तित हो गया।

दिनेश जब जेल से छूटकर बाहर आया तब उसने सुरेश से कुछ पैसे लिए और उन पैसो से एक बुरे पुजारी से पवित्र जल ख़रीदा और सुनहरी नदी कि ओर चल पड़ा। पहाड़ चढ़ते समय दिनेश को प्यास से तडपता हुआ एक बच्चा दिखाई दिया लेकिन दिनेश ने भी उसे पानी नहीं पिलाया और आगे बढ़ गया। और थोडा आगे जाने पर दिनेश ने देखा कि उसका भाई रमेश एक चट्टान पर लेटा हुआ था और दिनेश से पानी मांग रहा था लेकिन दिनेश ने उसे भी पानी नहीं पिलाया और उसके ऊपर हसने लगा और आगे कि ओर चल पडा। और वह पहाड़ी कि चोटी पर पहुच गया और वह पवित्र जल उस सुनहरी नदी में फेक दिया लेकिन नदी सुनहरी रंग में परिवर्तित नहीं हुई और दिनेश भी काले चट्टान में परिवर्तित हो गया।

सुरेश ने अपने भाइयो का बहुत दिनों तक इन्तजार किया लेकिन वे कभी वापिस नहीं आये फिर अंत में सुरेश ने निर्णय लिया कि वह खुद उस सुनहरी नदी में पवित्र जल डालने जाएगा। वह एक अच्छे पुजारी के पास गया उस पुजारी ने सुरेश को पवित्र जल प्रदान किया। सुरेश कम उम्र का और छोटा था इसलिए उसे भी पहाड़ी चढ़ने में बहुत दिक्कत हो रही थी। कुछ देर पहाड़ चढ़ने पर सुरेश को भी प्यास लगी। उसने भी उस पवित्र जल में से थोडा जल पिने कि सोची और जैसे ही उसने पानी पिने के लिए हाथ ऊपर कि ओर किया उसे भी सामने ही एक बुढा आदमी दिखाई दिया। वह बूढा आदमी सुरेश के पास आया और सुरेश से उसने पानी माँगा। सुरेश ने देखा कि वह आदमी बहुत ही प्यासा लग रहा है इसलिए सुरेश ने उसे पिने के लिए पानी कि बोतल दे दिया। उस आदमी ने बोतल में से दो तिहाई पानी पिने के बाद बोतल लौटा दिया और सुरेश को आशीर्वाद दिया।

सुरेश के पास खुद के पिने के लिए पानी नहीं बचा था। सुरेश आगे अपनी मंजिल कि ओर चला गया और कुछ देर के बाद सुरेश कि प्यास और बढ़ गयी उसने भी थोडा पानी पीना चाहां लेकिन तभी उसे वहा एक छोटा बच्चा दिखाई दिया। सुरेश ने अपने आप से माफ़ी मांगी और उस छोटे बालक को पानी पिने के लिए दे दिया। पानी पीकर वह बालक मुस्कुराने लगा और पहाड़ी से निचे कि ओर चला गया।

अब उस बोतल में पानी कि सिर्फ कुछ बुँदे ही रह गयी थी जब सुरेश पहाड़ी कि चोटी पर पहुचा और सुरेश को भी बहुत प्यास लगी थी। तभी सुरेश को एक पिल्ला दिखाई दिया वह भी बहुत प्यासा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह प्यास से मरने वाला हो सुरेश ने सोच कि उसे उस पिल्ले कि मदद करनी चाहिए नहीं तो वह पिल्ला मर जाएगा। सुरेश ने पानी कि कुछ बुँदे जो बची थी उस पिल्ले के मुह पर छिड़क दिया। वह पिल्ला खड़ा हुआ और सुनहरी नदी के राजा के रूप में बदल गया और वह सुरेश से बहुत प्रसन्न हुआ। उस राजा ने सुरेश के बोतल में कुछ ओस कि बुँदे डाल दी और सुरेश से कहा कि इन बूंदों को उस नदी के पानी में डाल दो। सुरेश ने ऐसा ही किया लेकिन नदी का पानी सुनहरा नहीं हुआ लेकिन कुछ देर बाद सुरेश ने देखा कि सबकुछ फिर से पहले कि तरह हो गया। वह घाटी फिर से हरी भरी हो गयी और फिर से खजाने वाली घाटी में बदल गयी और उपजाऊ हो गयी। यह सब देखकर सुरेश बहुत खुश हुआ और उस घाटी में ख़ुशी ख़ुशी रहने लगा और गरीब और जरुरतमंद लोगो कि मदद करता। उसके खेत हमेशा हरे भरे और लहलहाते रहते।

... सुनहरी नदी - Golden River Part 1
- RAKESH PAL