सुनहरी नदी - Golden River Part 1

September 26, 2020
sunhari nadi

सुनहरी नदी का राज - खजाने की घाटी

बहुत समय पहले कि बात है एक देश में पहाड़ो के बिच एक घाटी थी वहा कि जमीन बहुत ही उपजाऊ थी। उन पहाडियों कि चोटी के ऊपर से बहुत झरने बहते थे उन झरनों का पानी घाटी में जाता था। उन झरनों में से एक झरना बहुत बड़ा था जिससे बहुत ज्यादा पानी उस घाटी में गिरता था। उस बड़े झरने का पानी सूर्य कि किरण पड़ने के कारण शाम के समय में सोने कि तरह दिखती थी इसलिए वहा के लोग उसे सुनहरी नदी भी कहते थे।

पहाडियों की वजह से हमेशा वहा का तापमान अच्छा और ठंडा रहता था हमेशा बादल घेरे रहते थे और बारिश भी अच्छी होती थी जिससे वह कि फसल, साग सब्जी और फल उत्तम गुणवत्ता के होते थे। उस घाटी के अलावा उस देश बाकी सभी जगहों पर सुखा पड़ा रहता। इसके विपरीत घाटी में सही और उत्तम वातावरण के कारण वहा कि फसल हरी भरी रहती, सेब, अंगूर, शहद सबकुछ उत्तम गुणवत्ता के होते थे इसलिए वह के लोग उस घाटी को खजाने की घाटी भी कहते थे।

वह खजाने की घाटी तीन भाइयो से सम्बन्धित थी रमेश, दिनेश, और सुरेश। दोनों बड़े भाई बहुत ही दुष्ट प्रवृर्ति के थे और किसी शैतान से कम नहीं थे। वे दोनों बहुत ही अच्छे किसान भी थे खेती के बारे में उन्हें बहुत जानकारी थी लेकिन जो चीज उनके काम का या उनके फायदे का नहीं होता वो उसे नष्ट कर देते थे।

वे अपने नौकरों से भी अच्छा व्यवहार नहीं करते थे उन्हें उनकी मजदूरी भी बहुत ही कम देते थे। वे भुट्टे कि फसल का बाज़ार में महंगा होने का इन्तजार करते थे और जब भुट्टे कि फसल के दाम बाज़ार में दो गुना बढ़ जाता तब उसे बाज़ार में बेचते थे। वे बहुत ज्यादा धनि थे लेकिन कभी किसी भी गरीब कि मदद नहीं करते थे। वहा के लोग उन्हें काले भाई कहते थे।

उनमे से जो सबसे छोटा भाई था वह सिर्फ बारह साल का था। वह अपने दोनों बड़े भाइयों के बिलकुल विपरीत स्वभाव का था। वह बहुत दयालु था उसके बड़े भाई उससे घर का सब काम करवाते थे खाना बनाना, घर कि साफ सफाई करवाना।

एक दिन दोनों बड़े भाई अपने किसी काम से बाहर गये थे तब हमेशा कि तरह अपने छोटे भाई सुरेश को आदेश देकर गये थे कि किसी को भी घर के भीतर न ले और न हीं किसी को कुछ दान दे। सुरेश शाम को अपने भाइयो के लिए रात का भोजन बना रहा था।

बाहर बहुत जोरो कि बारिश हो रही थी और मौसम भी बहुत ठंडा था। तभी दो बार दरवाजा खटखटाने कि आवाज़ आई। तभी सुरेश खिड़की कि तरफ गया और खिड़की से झांक कर बाहर देखा कि दरवाजे पर कौन है। सुरेश ने देखा कि बाहर एक सामान्य से अलग दिखने वाले एक सज्जन पुरुष बाहर दरवाज़े के पास खड़े थे। वह अजनबी कद में छोटा था उसकी नाक लम्बी थी, उसके गाल लाल थे, एक गोल अकार कि लम्बी टोपी पहनी थी और अपने कद से चार गुना लम्बा एक चोला पहन रखा था।

उस अजनबी ने सुरेश से कहा कि वह बारिश में भीग गया है उसे घर के अन्दर आने दे। सुरेश ने उस अजनबी से क्षमा मांगते हुए कहा कि मुझे माफ़ कर दे मै आपको अपने घर के भीतर नहीं ले सकता। मेरे बड़े भाई मुझे जान से मार देंगे यदि मैंने ऐसा कुछ किया तो। लेकिन सुरेश ने देखा कि कितनी जोर से बारिश हो रही थी और मौसम भी बहुत ठंडा था और वह अजनबी भी बारिश किस तरह भीगा हुआ था। इसलिए सुरेश को उस अजनबी पर दया आ गयी और सुरेश ने उस अजनबी को घर के अन्दर आने दिया। सुरेश ने उस अजनबी से कहा कि वह अपने कपडे सुखा ले कुछ देर में उसके दोनों बड़े भाई के आने से पहले वहा से चला जाये।

लेकिन उस अजनबी का वहां से जाने का कोई इरादा नहीं था उसने सुरेश से कहा कि उसने दो दिन से कुछ भी नहीं खाया है और उसे बहुत भूख लगी है। यह सुनकर सुरेश का दिल पिघल गया और उसने उस अजनबी को अपने हिस्से का रात का खाना देने का निश्चय किया। वह अजनबी खाना खाता इससे पहले उसके दोनों बड़े भाई आ गये और उस अनजान अजनबी को अपने घर में देखकर चौक गये।

उन्होंने अपने छोटे भाई सुरेश पर चिल्लाना सुरु कर दिया। रमेश ने एक डंडा फेका सुरेश को मरने के लिए तभी उस अजनबी ने तुरंत उस डंडे को अपनी गोल टोपी में पकड़ लिया और एक कोने के कमरे में जाकर छिप गया। उन दोनों भाइयो ने उस अजनबी को घर से बहार निकलने के लिए कहा। उस अजनबी से उनसे मिन्नत किया कि बहार मौसम बहुत ठंडा है और बारिश है इसलिए वह उसे अपने घर में रहने दे। लेकिन उन शैतान भाइयो ने उसकी एक न सुनी और उस अजनबी को घसीट कर घर से बाहर फेकने लगे तभी उन्हें अहसास हुआ कि वे उस अजनबी को नहीं खीच पा रहे थे और वे खुद ही एक कोने में जा कर गिर गए।

अजनबी ने अपनी टोपी और चोला लिया और बोला कि आज रात बारह बजे वह फिर उन्हें बुलाएगा जब से उन्होंने उसके साथ बुरा व्यवहार किया है और इन सबका भुगतान करना पड़ेगा। इतना कहकर वह बवंडर कि तरह चला गया। उस रात एक बड़ा तूफ़ान आया और दोनों भाई जाग गये उस तूफ़ान ने उनके घर को हिलाकर रख दिया और उनके घर कि छत को उखाड़कर फेक दिया। उन दोनों भाइयो ने उस रात दोबारा उस अजनबी को देखा वह अजनबी उन बदलो पर बैठा हुआ ऊपर निचे हो रहा था।

उस अजनबी ने उन दोनों भाइयो से कहा कि वे दोनों अपने छोटे भाई के कमरे में जाए और उनके घर का नुक्सान उसने नहीं किया है। अगले दिन सुबह उन दोनों भाइयो ने देखा कि तूफान जा चूका था खजाना घटी से और हर तरफ सिर्फ लाल रेत और कीचड़ था। सबकुछ बर्बाद हो चुका था।

... सुनहरी नदी - Golden River Part 2
- RAKESH PAL