दयालु राजा की कहानी | Generous King

September 26, 2020
dayalu raja

राजा अच्छा होना चाहिए लेकिन दयालु राजा होना उससे भी अच्छा होता है।

एक बार कि बात है किसी जंगल में एक शेर रहता था। वह बहुत ही बहादुर और अकार में बड़ा था और दिखने में भयंकर भी था। जंगल के बाकि सभी जानवर उसे जंगल का राजा कहते थे। वे राजा को हमेशा कुछ न कुछ उपहार लाकर देते थे। लेकिन उस राजा कि इच्छा और ज्यादा पाने कि थी। एक दिन उस शेर ने अपने आप से कहा कि मै यहाँ का राजा हूँ इसलिए मेरा एक दरबार भी होना चाहिए।

उसने लोमड़ी को अपने पास बुलाया और कहा कि तुम बहुत चालाक, होसियार और बुद्धिमान हो इसलिए तुम मेरे सलाहकार बन जाओ। लोमड़ी ने उस शेर कि बात मान ली और उसका सलाहकार बन गया। फिर शेर ने चीता को बुलाया और उससे कहा कि तुम बहुत तेज हो और शिकार करने में माहिर हो और बहुत तेज दौड़ते हो इसलिए तुम मेरे अंगरक्षक बन जाओ। चीते ने शेर कि बात मान ली और उसका अंगरक्षक बन गया। फिर शेर ने गिद्ध को बुलाया और उससे कहा कि तुम एक पंछी हो और आकाश में बहुत ऊपर तक उड़ सकते हो और बहुत दूर तक देख सकते हो इसलिए तुम मेरा सन्देश वाहक बन जाओ। गिद्ध ने भी शेर कि बात मान ली और राजा का सन्देश वाहक बन गया। लोमड़ी,गिद्ध और चीते ने सपथ लिया कि वे अपने राजा के हर आदेश का पालन इमानदारी से करेंगे और उसका साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। शेर ने भी उन तीनो को भोजन और सुरक्षा देवे का वचन दिया।

इस तरह शेर का दरबार और दरबारी बन गए और उनका दरबार चलने लगा। ऐसे ही कई दिनों तक सब कुछ ठीक ठाक चलता रहा। वे तीनो अपने राजा के आदेश का अच्छे से पालन करते और कभी भी पलट कर जवाब नहीं देते थे। वह शेर कि इच्छा को ही आदेश मानते थे। शेर जब कही जाता तब वे तीनो उसके साथ जाते थे। जब शेर कभी शिकार करने जाता तब वे तीनो शेर के लिए शिकार कि खोज करते थे। शेर शिकार करने के बाद उस जानवर को खा जाता और शेर के खाने के बाद जो बच जाता वह बचा हुआ शिकार वे तीनो खाते थे और उतना उन तीनो के लिए काफी रहता था।

एक बार गिद्ध एक लांबी उड़ान के बाद वापस आया और शेर से कहा कि महाराज क्या आपने कभी ऊंट का मांस खाया है? मैंने एक बार खाया था रेगिस्तान में, ऊँट का मांस बहुत ही स्वादिस्ट होता है। शेर ने कभी ऊँट को नहीं देखा था, लेकिन उसे गिद्ध का ऊँट खाने का यह विचार पसंद आया। उसने गिद्ध से पुछा कि लेकिन ऊँट कहा मिलेगा? गिद्ध ने कहा यहाँ से कुछ किलोमीटर दूर एक रेगिस्तान है वहा ऊँट मिलेगा उसने एक ऊँट को रेगिस्तान में देखा है वह ज्यादा दूर नहीं है और वह ऊँट बड़ा और मोटा है। शेर ने अपने बाकि सलाहकार और अंगरक्षक कि ओर देखा शेर उनकी भी इच्छा जानना चाहता था। लेकिन लोमड़ी और चीते को रेगिस्तान के बारे में नहीं पता था। लेकिन लोमड़ी और चीता गिद्ध को शेर के सामने अपने से ज्यादा समझदार नहीं साबित होने देना चाहते थे। इसलिए उन दोनों ने कहा कि यह गिद्ध का विचार था इसलिए वही हमें मार्गदर्शन करेगा।

अगले दिन सुबह होते ही शेर और उसके साथी ऊँट शिकार करने निकल पड़े। कुछ देर चलने के बाद वे रेगिस्तान के बीच में पहुच गए जंगल से बहुत दूर आ गये थे। उस दिन बहुत गर्मी भी पड़ रही थी सूरज से जैसे कि आग निकल रही हो। गिद्ध उन लोगो से बहुत दूर उड़ते हुए आसमान में चला गया और बोला कि ऊँट अब ज्यादा दूर नहीं है। लेकिन शेर को अधिक भूख लगी थी और रेगिस्तान कि रेत बहुत गरम थी जिससे उनके पैर जल रहे थे और आगे नहीं जा पा रहे थे गर्मी के कारण। शेर ने जोर से कहा कि रुको अब हम और आगे नहीं जायेंगे अब जंगल कि तरफ वापस लौट चलते है, मुझे ऊँट का मांस नहीं खाना है। शेर का सलाहकार डर गये क्योकि वे जंगल से बहुत दूर आ गये थे जंगले वापस जाने का रास्ता याद नहीं था। शेर को वापस जंगले में कैसे लेकर जायेंगे। गिद्ध को ऊँट का मांस खाना था, तभी बुद्धिमान लोमड़ी को एक उपाय सुझा, उसने कहा कि मै रेगिस्तान में आगे जाकर कुछ मदद लेकर आता हु। कुछ दूर जाने के बाद लोमड़ी को एक ऊँट मिल गया। ऊँट भी लोमड़ी को देखकर आश्चर्यचकित हुआ।

लोमड़ी ने ऊँट से कहा जल्दी चलो ऊँट भाई मेरे राजा आपसे एक बार मिलना चाहते है। ऊँट ने कहा आपके राजा, कौन है? मै सिर्फ अपने मालिक को जानता हु जिसके लिए मै काम करता हु उनका सामान ढोता हु। लोमड़ी ने कहा हमारे राजा शेर है उन्होंने आपके मालिक को मार दिया है और अब तुम आज़ाद हो, राजा ने तम्हे अपने दरबार में बुलाया है मेरे साथ आओ। ऊँट लोमड़ी के पीछे चल दिया। जब लोमड़ी और ऊँट राजा के पास पहुचे तब गिद्ध और चीता उन दोनों को देखकर आश्चर्यचकित हो गये और शेर भी हैरान हो गया।

ऊँट को शेर के आगे पेश किया गया। लोमड़ी ने कहा महाराज आप इस ऊँट के ऊपर बैठकर जंगल पहुच सकते है इसलिए आप ऊँट की पीठ पर बैठ जाये। शेर उछल कर ऊँट की पीठ पर बैठ गया उसके पीछे चीता और लोमड़ी भी ऊँट के पीठ पर बैठ गये और गिद्ध आगे उड़ता हुआ जंगल कि तरफ जाने में उनका मार्गदर्शन कर रहा था। जंगल में पहुचने के बाद वे थक चुके थे और उन्हें भूख भी लग गयी थी। उन तीनो ने ऊँट कि तरफ देखा और फिर एक दुसरे को देखने लगे उनकी निगाहों में भूख दिख रही थी। वे तीनो भूखी नजरो से ऊँट को देखने लगे, उन्होंने ऊँट को शेर के भोजन के लिए लाया था और अब खाने का समय भी हो गया था। शेर को पता था कि उसके साथी क्या सोच रहे है उसने ऊँट को बुलाया और ऊँट का शुक्रिया अदा किया और उसे उन तीनो कि रेगिस्तान में से जान बचाकर लाने के लिए ऊँट का धन्यवाद किया, और ऊँट से कहा कि अब तुम मेरे मित्र हो तुम जब तक चाहो मेरे दरबार में रह सकते हो, मै तम्हारी सुरक्षा करूँगा। यह सब सुनकर शेर के दरबारी चौक गये और सोचने लगे कि यदि उन लोगो ने अपनी जान को खतरे में डालकर ऊँट को लाया और शेर उसे ऐसे ही जाने दे रहा है।

शेर के दरबारी उसकी आदेश से खुश नहीं थे लेकिन वे उसके आदेश का विरोध भी नहीं कर सकते थे। शेर के पैर रेगिस्तान में बुरी तरह जल गये थे इसलिए वह शिकार करने नहीं जा सकता था लेकिन अधिक देर तक भूखा भी नहीं रह सकता था। उसने चीता ,लोमड़ी और गिद्ध तीनो को जोर से चिल्लाया और कहा कि मै बीमार हूँ और मुझे भूख लगी है जाओ मेरे लिए खाना लेकर आओ। अब उन्हें शेर के आदेश का पालन करना था इसलिए वे वहा से चले गये। लेकिन वे ज्यादा दूर नही गये। वे एक सुरक्षित स्थान पर बैठ गए और सोचने लगे कि अब उन्हें आगे क्या करना है। लोमड़ी को एक उपाय सुझा उसने उन दोनों से कहा कि मै ऐसा करूँगा कि ऊँट खुद बोलेगा कि शेर उसे भोजन के रूप में खा ले। उसने अपना उपाय बाकि दोनों को बताया और सब ने मान लिया और वे वापस शेर के पास आ गये।

गिद्ध सबसे पहले आगे गया और धीमे स्वर में कहा महाराज हम आपके लिए भोजन का प्रबंध नहीं कर पाए लेकिन हम आपको भूखा नहीं रहने देंगे आप मुझे खा लीजिये। फिर लोमड़ी आगे आई उसने गिद्ध को बगल में हटाया और शेर से कहा महाराज आप मुझे खा लीजिये मेरे में गिद्ध से ज्यादा मांस है, इसलिए आप मुझे खा लीजिये और इतना कहकर रोने लगा। और फिर चीता भी आगे आया और शेर से कहा महाराज आप मुझे खा लीजिये मै आपका भोजन बनने के लिए तैयार हूँ इतना कहकर रोने लगा। ऊँट वह खड़ा सब कुछ सुन रहा था फिर ऊँट ने भी वही किया और शेर से कहा महाराज आप मुझे खा लीजिये मै आपके लिए अपनी जान दे सकता हु। ये सब आपके पुराने मित्र है ये आपके लिए ज्यादा जरुरी है आप इनकी जगह मुझे खा लीजिये।

गिद्ध, लोमड़ी और चीता यही शब्द सुनना चाहते थे ऊँट से और यही उनका उपाय भी था। चीते ने ऊँट पर हमला कर दिया लेकिन शेर ने उसे रोक दिया और कहा कि तुम सब मरे अच्छे मित्र हो, मेरा ह्रदय गदगद हो गया है तुम सब का मेरे प्रति यह कुर्बानी देख कर तुम सबका मान रखते हुए तुम्हारा यह प्रस्ताव स्वीकार करता हु। मै बारी बारी तुम सबको खाऊंगा, क्रम के हिसाब से जिसने पहले यह प्रस्ताव दिया पहले उसको और उसके बाद दुसरे को खाऊंगा। यह सुनते ही गिद्ध, लोमड़ी और चीता चौक गये, और गिद्ध आस्मां में उड़ गया, लोमड़ी और चीता जंगल में भाग गए। शेर को यह सब देखकर बहुत हसी आई फिर वह ऊँट कि तरफ मुडा और ऊँट से कहा कि तुम बहुत ही वफादार और अच्छे हो। तुम हमेशा मेरे मित्र रहोगे जब तक हम जीवित रहेंगे।

ऊँट यह सब सुनखर बहुत खुश हुआ और गर्व महसूस करने लगा। शेर ने अपने आप से कहा राजा अच्छा होना चाहिए लेकिन दयालु राजा होना उससे भी अच्छा होता है।

- RAKESH PAL
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