गुस्सा या क्रोध को कैसे काबू में करे? | How to control anger

गुस्से में मनुष्य ऐसे शब्द बोल देता है जिसका उन्हें जीवन भर पछतावा रहता है।

जैसे कि इस संसार में सभी लोगो को कभी न कभी गुस्सा या क्रोध आता ही है। जब यह गुस्सा या क्रोध आता है तब मनुष्य का दिमाग काम करना बंद कर देता है। उस समय मनुष्य के मन में जो भी आता है सब बोल देता है अच्छा बुरा कुछ नही देखता है। गुस्सा शांत होने के बाद पता चलता है कि यह हमने क्या कर दिया और अपनी गलती का अहसास भी होता है, और पछतावा भी होता है, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं। इसके ऊपर हिंदी में एक मुहावरा भी है। “अब पछताने से क्या होगा जब चिड़िया चुग गयी खेत।”

एक कहानी के माध्यम से समझते है इसके बाद आप गुस्सा करना छोड़ देंगे। अपने क्रोध को अपने वश में करना सिख जाओगे। एक गाव में एक झगड़ालू औरत रहा करती थी। अक्सर वह छोटी छोटी बातो पर गुस्सा हो जाती, गुस्से में किसी को भी गालियां दे देती और भला बुरा कहती। लेकिन कुछ समय पश्चात् उसका गुस्सा उतरता तब उसे अपने किये पर बहुत पछतावा होता। उसके परिवार के सभी सदस्य उसके इस स्वाभाव से अत्यंत परेशान रहते थे। उस घर में हमेशा ही एक लड़ाई और अशांति का माहौल बना रहता था।

उस औरत के उस क्रोधी स्वाभाव के कारण उसके पडोसी भी उसे पसंद नहीं करते थे। इस बात कि समझ उस औरत को भी थी, कि उसके इस गुस्सैल स्वाभाव के कारण उसे कोई भी पसंद नहीं करता था। लेकिन चाह कर भी गुस्सा आने पर वह अपने आप को अपशब्द बोलने से नहीं रोक पाती थी। एक दिन एक साधू उस औरत के दरवाजे पर भिक्षा मांगने आये। साधू को भिक्षा देने के बाद वह स्त्री अपनी यह परेशानी उस साधू महाराज को बताती है। वह कहती है साधू महाराज, मुझे बहुत जल्दी ही गुस्सा आ जाता है। और मै चाहकर भी अपने गुस्से को रोक नहीं पाती हूँ। कृपा करके मुझे इस गुस्से का कोई उपाय बताये?

जिससे मै अपने गुस्से को काबू में कर सकू। साधू महाराज ने उस स्त्री कि बात को बड़े ध्यान से सुना और कुछ देर तक सोचने के बाद अपने झोले में से दवा से भरी एक बोतल निकाल कर उस स्त्री को देते है और कहते है कि मेरी बात को ध्यान से सुनो, यह क्रोध को वश में करने कि सबसे अचूक दवा है। अबसे जब भी तुन्हें क्रोध आये और किसी को कुछ भी अपशब्द कहने का मन करे तब अपनी जीभ पर इस दवा कि चार बुँदे डाल लेना। और कम से कम दस मिनट तक अपने मुह को बंद रखना। यदि तुमने दस मिनट से पहले मुह को खोल दिया तब इस दवा का कोई महत्त्व नहीं रहेगा। और यह दवा अपना प्रभाव ठीक से नही दिखा पायेगी।

इतना कहकर वह साधू महाराज वह से चले जाते है। और इसके बाद से वह स्त्री साधू के बताये अनुसार उस दवा का उपयोग करना सुरू कर दिया। जब भी उसे गुस्सा आता वह उस दवा कि चार बूंद अपने जीभ पर डाल लेती और कम से कम दस मिनट तक अपना मुह बंद रखती और फिर गुटक लेती। इस प्रक्रिया को अगले पंद्रह दिन तक करने के बाद ही उस स्त्री कि गुस्सा करने कि आदत छुट जाती है।

एक महीने के बाद जब वह साधू महाराज दुबारा उस औरत के घर भिक्षा मांगने आते है तब वह औरत दौड़ते हुए साधू महाराज के पास आती है, और साधू महाराज के पैर पकड़ लेती है। और कहती है कि महाराज आपकी दवा ने तो मुझपर जादू कर दिया। आपके दवा के प्रभाव के कारण अब मुझे बात बात पर गुस्सा नहीं आता। और अब मेरे घर परिवार में भी शान्ति का वातावरण रहता है।

अब मै बहुत खुश हूँ महाराज। उस स्त्री के मुह से यह शब्द सुनकर साधू महाराज मुस्कुराते हुए कहते है, कि पुत्री उस बोतल में तो क्रोध कि कोई दवा थी ही नही। बल्कि वह बोतल तो सिर्फ पानी से भरी हुई थी उसमे सिर्फ पानी के अलावा और कुछ भी नहीं था। तुमने अपने गुस्से पर काबू उस दवा के वजह से नही, बल्कि चुप्प रहने से पाया है। गुस्से पर काबू केवल चुप्प रहकर ही पाया जा सकता है। क्योकि गुस्से में मनुष्य अपने मुह से अपशब्द बोलता है। जो नए नए झगड़े और परेशानियों को जन्म देते है। इसलिए क्रोध के वक्त मौन धारण कर लेना ही क्रोध को वश में करने का एकमात्र उपाय है।

हम हमारी जीवन में भी हर एक छोटी छोटी बातो पर गुस्सा हो जाते है। अपना आपा खो बैठते है। और फिर बाद में हम पछताते है कि काश गुस्सा न किया होता। जब मनुष्य गुस्से में होता है तब उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है। सिर्फ उसका मुह बोल रहा होता है। और कई बार गुस्से में मनुष्य ऐसे शब्द बोल देता है जिसका उन्हें जीवन भर पछतावा रहता है। कई बार कुछ मिनटों के गुस्से के वश में आकर मनुष्य न केवल मेंटल विओलेंस करता है बल्कि कई बार घातक physical violance कर बैठता है। फिर जिसका परिणाम उसे अपनी पुरे जीवन भर भुगतना पड़ता है। जबकि गुस्सा तो केवल कुछ मिनटों का होता है।

यदि हम गुस्से के उन पलो में कुछ देर शांत रह पाए तो हम अपनी जीवन कि बहुत सी लड़ाई झगड़ो और समस्याओ को सुरु होने से पहले ही ख़तम कर सकते है। इसलिए अब जब भी अगली बार गुस्सा आये तब दिमाग को शांत रखते हुए उस दवा के कुछ बूंद अपने मुह के अन्दर डाल ले और कुछ समय तक अपना मुह बंद रखे। जिससे आप आगे आनेवाली कई समस्याओ से बच जायेंगे।

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