“Free” का जाल बहुत ही घातक होता है?

Discount, Free Offer और Trial के चक्कर में फ़सा इंसान

आज के आधुनिक दौर में ग्राहकों को लुभाने के लिए, अपनी ओर आकर्षित करने के लिए कंपनिया कई प्रकार के Free Offer देती है। या यु कहे कि ये कंपनियां सीधे तौर पर ग्राहकों को लालच देती है free के नाम पैर, कंपनियां भी इंसान के मनोव्रती को समझती है कि आज के समय का मनुष्य बहुत ही लालची हो चूका है वो इनके free के जाल में आसानी से फस जायेगा, इसलिए कंपनियां हर जगह Free Offer या Trial (ट्रायल) का बोर्ड लगाये रखते है 10%, 20%, 30%, 40%, 50% Off तो कही पर 80% Off.

ग्राहक का मन भले ही कुछ खरीदने का न हो लेकिन वह free offer का बोर्ड देखकर दुकान में या shopping center के अन्दर चला ही जाता है और अन्दर जाने के बाद उसे पता चलता है कि बोर्ड पर दिए गये विज्ञापन में और जिस सामान पर विज्ञापन दिया गया है उसमे बहुत ही जादा अंतर है।

हद तो तब हो गयी जब भारत के नेता भी जनता को free का लालच देने लगे कि मुझे जीताओ तो बस में 6 महीने कि यात्रा free, 6 महीने बिजली free, पानी free, टिकट free और न जाने क्या क्या लालच देते है और चुनाव भी जीतने लगे जनता को free का लालच देकर।

जनता भी महामूर्ख है वे यह नहीं सोचते कि कोई भी नेता या कंपनी हमें free क्यू दे रहे है उसके पीछे उनका क्या उद्देश्य है क्योकि आज के समय में तो कोई किसी से free में बात तक नहीं करता रिश्ता भी मतलब से रखते है। कोई भी free में किसी का काम क्यों करेगा बाज़ार में कोई भी बिना मतलब के नहीं घूमता, हर कोई अपने मकसद को पूरा करने के लिए पैसा कमाने के लिए बहार जाता है समाज सेवा करने के लिए नहीं।

जिस प्रकार शिकारी अपने शिकार को पकड़ने के लिए जाल बिछाता है और उसके ऊपर दाना डाल देता है दूर से शिकार को सिर्फ दाना ही दीखता है दाने के निचे का जाल उसे दिखाई नहीं देता क्योकि दाने के निचे के जाल को शिकारी अच्छी तरह से दाने से ढक देता है जिससे कि शिकार को सिर्फ दाना ही दिखाई दे और शिकार दाना खाने आये और आसानी से जाल में फस जाए और यही होता भी है शिकार free के दाने के चक्कर में शिकारी के जाल में फस जाता है।

फसने के बाद शिकार को अपनी गलती का अहसास होता है वह बहुत छटपटाता है लेकिन जाल से बहार नहीं निकल पाता है और अंत में शिकारी उसे पकड़ लेता है और शिकार को free के दाने कि कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। शिकार तो जानवर या पंछी होते है वे जादा सोच समझ नहीं सकते उनके पास उतना दिमाग नहीं होता उनको सिर्फ अपनी भूख मिटानी होती है इसलिए वे फस जाते है।

लेकिन इसके विपरीत इंसान के पास तो बुद्धि भी होती है और वह पढ़ा लिखा भी होता है फिर भी वह इस free के चक्कर में फस जाता है और अंत में फसने के बाद दुखी होता है लेकिन अब पछताने से क्या फायदा जब चिड़िया चुग गयी खेत।

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