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Dharma Samaj

Mantra – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

Karagre Vasate Lakshmi

ऊं कराग्रे वसते लक्ष्‍मी: करमध्‍ये सरस्‍वती। करमूले च गोविंद: प्रभाते कुरुदर्शनम्।।

इसका मतलब है, ‘हथेली के सबसे आगे के भाग में लक्ष्मीजी, बीच के भाग में सरस्वतीजी और मूल भाग में ब्रह्माजी निवास करते हैं. इसलिए सुबह दोनों हथेलियों के दर्शन करना करना चाहिए.


Bhagirathi Ganga

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।


Ganga Maiya

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम्
करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोऽहम्।।


Mata Gayatri

गायत्री मन्त्र :

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।।

गायत्री मंत्र के पहले नौं शब्द प्रभु के गुणों की व्याख्या करते हैं
ॐ = प्रणव
भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाला
भुवः = दुख़ों का नाश करने वाला
स्वः = सुख़ प्रदाण करने वाला
तत = वह सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल
वरेण्यं = सबसे उत्तम
भर्गो = कर्मों का उद्धार करने वाला
देवस्य = प्रभु
धीमहि = आत्म चिंतन के योग्य (ध्यान)
धियो = बुद्धि, यो = जो, नः = हमारी, प्रचोदयात् = हमें शक्ति दें


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विष्णु मंत्र :

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

ओम नमो भगवते वासुदेवाय सबसे लोकप्रिय हिंदू मंत्रों में से एक है, और वैष्णववाद में सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है। इसे द्वादशाक्षरी मंत्र या केवल द्वादशाक्षरी कहा जाता है, जिसका अर्थ है भगवान कृष्ण के रूप में विष्णु को समर्पित “बारह-शब्दांश” मंत्र। इसकी दो परंपराएं हैं- तांत्रिक और पुराणिक।


Ganga Maiya

महामृत्युंजय महामंत्र :

ॐ हौं जूं स: भूर्भुव: स्व:
ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बंधनानमृत्योर्मुक्षीय मामृतात।
स्व:भुव: भू ॐ स: जूं हौं ॐ।


Guru

“गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु: देवो महेश्वरा: गुरु साक्षात परम ब्रह्मा, तस्मै श्री गुरुवे नम:।”

इस मन्त्र का मतलब है कि गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है, गुरु ही भगवान शंकर है, और गुरु ही साक्षात परब्रह्म है. ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं. यह श्लोक महर्षि वेदव्यास जी द्वारा रचित ‘गुरु गीता’ का है, जो कि स्कंद पुराण का एक भाग है।

‘गुरु ग्रह गए पढ़न रघुराई, अल्पकाल विद्या सब आई’ – जो व्यक्ति सच्चे मन से अपने गुरु की शरण में जाता है, वह थोड़े समय में ही सभी तरह की विद्या हासिल कर लेता है. 

सुबह सबसे पहले करें इन मंत्रों का जप

  • जाप करते समय कोई आसन या कुश का आसन बिछा कर करें।
  • जाप करते समय पूर्व दिशा की तरफ मुख करें।
  • मंत्र का जाप करने के लिए एक जगह तय कर लें रोजाना जगह न बदलें।
  • मंत्र करते समय अपने मन को कहीं दूसरी तरफ न भटकने दें।
  • जितने दिन तक आप यह जाप करें उतने दिन मांसाहार या शराब का सेवन न करें।
  • जाप रुद्राक्ष माला से करें।

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