गणेश चतुर्थी 'विनायक चतुर्थी' के नाम से भी जानी जाती है

August 18, 2020
Ganpati bappa moriya

आप सबको श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं

गणेश चतुर्थी का यह पर्व भगवन श्री गणेश के जन्मोत्सव के रूप में पुरे भारत में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी यह एक हिन्दू धर्म का त्यौहार है। गणेश चतुर्थी का त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार हर साल अगस्त या सितंबर के महीनें में हिंदी कैलेंडर के अनुसार भाद्र माह की चतुर्थी में मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी का त्यौहार पूरे 11 दिन का होता है। यह त्यौहार 11 दिनों तक चलने वाला सबसे लंबा त्यौहार है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घरों में गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति लेकर आते हैं और 10 दिन तक उनकी पूजा करने के बाद 11वें दिन गणेश विसर्जन कर देते हैं। और कई लोग डेढ़ दिन, तिन दिन पांच दिन, और सात दिन भी तक पूजा करते है और विसर्जन कर देते है सबकी अपनी मन्नत रहती है।

सार्वजनिक गणेशोत्सव ११ दिनों का होता है इसमें ११ दिन नाचते गाते हुए विसर्जन किया जाता है। गणेश चतुर्थी का त्यौहार देश के विभिन्न राज्यों में मनाया जाता है लेकिन मुख्य रूप से महाराष्ट्र में मनाया जानें वाला सबसे बड़ा त्यौहार है। यह त्यौहार चतुर्थी के दिन घर और मंदिर में गणेश मूर्ति स्थापना से शुरू होता है। लोग अपने घरों में गणेश जी मूर्ति बड़ी धूमधाम से ढोल-नगाड़े बजाकर लेकर आते हैं।

गणेश चतुर्थी से कुछ दिनों पहले ही बाजारों में रोनक शुरू हो जाती और मिट्टी से बनीं गणेश जी की अलग अलग तरह की मुर्तिया मिलती है। सभी लोग गणेश चतुर्थी से लेकर अगले 10 दिन तक अपने घरों और मंदिरों में गणेश भगवान की पूजा और अराधना करते हैं, गीत गाते हैं, नाच गाना करते हैं, मंत्रोच्चारण करते हैं, आरती करते और गणेश जी को मोदक का प्रसाद चढ़ाते हैं। इन दिनों में मंदिरों में खूब साज-सजावट की जाती। कोई भी नया काम शुरू करने से पहले गणेश भगवान को सबसे पहले याद किया जाता है। गणेश भगवान सभी बच्चों के सबसे प्रिय भगवान हैं। बच्चे उन्हें प्यार से गणेशा बुलाते हैं। महारास्ट्र में गणेश चतुर्थी पर अद्भुत रोनक देखने को मिलती है।

मुंबई के गणेशोत्सव कि तो बात ही निराली है बहुत ही अद्भुत है। मुंबई का लालबाग का राजा पुरे विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ तो गणपति जी के दर्शन के लिए लम्बी लम्बी कतारे भी लगती है। मन्नत वालो के लिए अलग कतार होती है और vip लोगो के लिए अलग और आम लोगो ले लिए अलग। मान्यता है कि इन दस दिनों के दौरान यदि श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ गणेश जी की पूजा किया जाए तो जीवन के समस्त बाधाओं का अन्त कर विघ्नहर्ता अपने भक्तों पर सौभाग्य, समृद्धि एवं सुखों की बारिश करते हैं। दस दिनों तक चलने वाला यह त्योहार हिन्दुओं की आस्था का एक ऐसा अद्भुत प्रमाण है जिसमें शिव-पार्वती नंदन श्री गणेश की प्रतिमा को घरों, मन्दिरों अथवा पंडालों में साज-श्रृंगार के साथ चतुर्थी को स्थापित किया जाता है। दस दिनों तक गणेश प्रतिमा का नित्य विधिपूर्वक पूजन किया जाता है और ग्यारहवें दिन इस प्रतिमा का बड़े धूम-धाम से विसर्जन कर दिया जाता है।

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी के सिद्धि विनायक स्वरूप की पूजा होती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन गणेश जी दोपहर में अवतरित हुए थे। इसीलिए यह गणेश चतुर्थी विशेष फलदायी बताई जाती है। पूरे देश में यह त्योहार गणेशोत्सव के नाम से प्रसिद्ध है। भारत में यह त्योहार प्राचीन काल से ही हिंदू परिवारों में मनाया जाता है। इस दौरान देश में वैदिक सनातन पूजा पद्धति से अर्चना के साथ-साथ अनेक लोक सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम भी होते हैं जिनमें नृत्यनाटिका, रंगोली, चित्रकला प्रतियोगिता, हल्दी उत्सव आदि प्रमुख होते हैं।

गणेशोत्सव में प्रतिष्ठा से विसर्जन तक विधि-विधान से की जाने वाली पूजा एक विशेष अनुष्ठान की तरह होती है जिसमें वैदिक एवं पौराणिक मंत्रों से की जाने वाली पूजा दर्शनीय होती है। महाआरती और पुष्पांजलि का नजारा तो देखने योग्य होता है। अन्नत चतुर्दशी के दिन यानि 11वें दिन गणेश विसर्जन के साथ गणेश भगवान को विदा कर दिया जाता है और अगले बरस जल्दी आने की कामना की जाती है।

गणेशजी का महत्व भारतीय धर्मों में सर्वोपरि है। उन्हें हर नए कार्य, हर बाधा या विघ्न के समय बड़ी उम्मीद से याद किया जाता है और दुःखों, मुसीबतों से छुटकारा पाया जाता है। श्री गणेशजी को विघ्न विनाशक माना गया है। गणेशजी को देवसमाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय गणेशजी का जन्म हुआ था। गणेशजी को बुद्धि का देवता भी माना जाता है। गणेशजी का वाहन चूहा है। इनकी दो पत्नियां भी हैं जिन्हें रिद्धि और सिद्धि के नाम से जाना जाता है। इनका सर्वप्रिय भोग मोदक यानी लड्डू है। जिस सार्वजनिक गणेशोत्सव को आजकल लोग इतनी धूमधाम से मनाते हैं उस त्यौहार को शुरू करने में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को काफी मुश्किलात और विरोध का सामना करना पड़ा था।

हालांकि सन् 1894 में कांग्रेस के उदारवादी नेताओं के भारी विरोध की परवाह किए बिना दृढ़निश्चय कर चुके लोकमान्य तिलक ने इस गौरवशाली परंपरा की नींव रख ही दी। बाद में सावर्जनिक गणेशोत्सव स्वतंत्रता संग्राम में लोगों को एकजुट करने का ज़रिया बनाया था। 1890 के दशक में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान तिलक अक्सर चौपाटी पर समुद्र के किनारे जाकर बैठते थे और सोचते थे कि कैसे लोगों को एकजुट किया जाए। अचानक उनके दिमाग में आइडिया आया, क्यों न गणेशोत्सव को घरों से निकाल कर सार्वजनिक स्थल पर मनाया जाए, ताकि इसमें हर जाति के लोग एकत्र हो सकें। विघ्नहर्ता गणेश पूजा भारत में प्राचीन काल से होती रही है। पेशवाओं ने गणेशोत्सव का त्यौहार मनाने की परंपरा शुरू की और सार्वजनिक गणेशोत्सव शुरू करने का श्रेय लोकमान्य तिलक को जाता है।

- RAKESH PAL