मानव का विकास, दशावतार और विज्ञान | हिंदी कहानियाँ

विज्ञान कहता है कि पहले जीवन पानी में आया था और विष्णु का पहला अवतार मत्स्य था।

जैसा कि हमें वर्षो से चाल्स डार्विन कि थ्योरी में पढाया जाता रहा है कि सर्वप्रथम जिव कि उत्पत्ति पानी में हुई थी उसके बाद धीरे धीरे वह जिव विकसित होने लगे और जमीन पर भी रहने में सक्षम हो गए। फिर समय के साथ और परिवर्तन हुआ और पानी के साथ साथ जमीन पर भी रहने वाले जीवो का विकास होने लगा।

यह प्रक्रिया वर्षो तक चलती रही और कालांतर में कई सारे विशाल जानवरों का निर्माण हुआ उन्होंने लाखो वर्षो तक इस पृथ्वी पर राज किया। समय के साथ परिवर्तन हुआ और अंत में विशाल के जानवर भी इस धरती से विलुप्त हो गये।

फिर आरंभ हुआ मनुष्यों का युग लेकिन उस समय वे इतने विकसित नहीं थे। मनुष्य दो प्रकार के होते थे- होमो इरेक्टस(नरवानर) और होमो सेपिअंस (मानव)। होमो इरेक्टस और होमो सेपियन में काफी समानताये थी लेकिन होमो सेपियन का दिमाक विकसित था वे औजारों का इस्तेमाल करना सुरु किया और होमो सेपिअंस ने विकास की लड़ाई जीत ली और विकास करते चले गये।

लेकिन हिन्दू धर्म ग्रंथो के अनुसार जीवन का आरंभ भगवान् विष्णु जी के द्वारा किया गया है। इसके लिए उन्होंने दस तरह के अलग अलग अवतार भी लिए है। इसका प्रमाण कई हिन्दू धर्म ग्रंथो में मिलता है। चाल्स डार्विन जैसे वैज्ञानिक तो बहुत ही पीछे है। इन विदेशी वैज्ञानिको ने सिर्फ तर्क दिया है इनके पास कोई भी प्रत्यक्ष प्रमाण नही है। जबकि हिन्दू धर्म का आरम्भ कब हुआ यह कोई नहीं जनता है। पुराणों में बताया गया है कि किस प्रकार से भगवान् विष्णु जी ने आरम्भ में पृथ्वी पर जीवन का निर्माण किया है। उनहोंने पृथ्वी पर जीवन को आरंभ करने के लिए दस अवतार लिए है। जिसमे से पहला अवतार है…

* मत्स्य अवतार-* (Matsya avatar)
“पहला अवतार था ‘मत्स्य’, यानि मछली। ऐसा इसलिए कि जीवन पानी में आरम्भ हुआ। यह बात सही है।

* कच्छप अवतार या कुर्म अवतार * (Kachhap avatar)
“उसके बाद आया दूसरा अवतार ‘कूर्म’, अर्थात् कछुआ। क्योंकि जीवन पानी से जमीन की ओर चला गया.. ‘उभयचर (Amphibian)’, तो कछुए ने समुद्र से जमीन की ओर के विकास को दर्शाया।”

* वराह अवतार * (Varah avatar)
“तीसरा था ‘वराह’ अवतार, यानी सूअर। जिसका मतलब वे जंगली जानवर, जिनमें अधिक बुद्धि नहीं होती है। तुम उन्हें डायनासोर कहते हो।”

* नृसिंह अवतार * (Narasimha avatar)
“चौथा अवतार था ‘नृसिंह’, आधा मानव, आधा पशु। जिसने दर्शाया जंगली जानवरों से बुद्धिमान जीवों का विकास।”

* वामन अवतार * (Vaman avatar)
“पांचवें ‘वामन’ हुए, बौना जो वास्तव में लंबा बढ़ सकता था। क्या तुम जानते हो ऐसा क्यों है? क्योंकि मनुष्य दो प्रकार के होते थे- होमो इरेक्टस(नरवानर) और होमो सेपिअंस (मानव), और होमो सेपिअंस ने विकास की लड़ाई जीत ली।”

* परशुराम अवतार * (Parshuram avatar)
“छठा अवतार था ‘परशुराम’, जिनके पास शस्त्र (कुल्हाड़ी) की ताकत थी। वे दर्शाते हैं उस मानव को, जो गुफा और वन में रहा.. गुस्सैल और असामाजिक।”

* श्री रामावतार * (Shree ramavtar)
“सातवां अवतार थे ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम’, सोच युक्त प्रथम सामाजिक व्यक्ति। जिन्होंने समाज के नियम बनाए और समस्त रिश्तों का आधार।”

*श्री कृष्णावतार * (Krishna avatar)
“आठवां अवतार थे ‘भगवान श्री कृष्ण’, राजनेता, राजनीतिज्ञ, प्रेमी। जिन्होंने समाज के नियमों का आनन्द लेते हुए यह सिखाया कि सामाजिक ढांचे में रहकर कैसे फला-फूला जा सकता है।”

* बुद्धावतार * (Gautam buddha)
“नवां अवतार थे ‘महात्मा बुद्ध’, वे व्यक्ति जिन्होंने नृसिंह से उठे मानव के सही स्वभाव को खोजा। उन्होंने मानव द्वारा ज्ञान की अंतिम खोज की पहचान की।”

* कल्कि अवतार * (Kalki avatar)
“..और अंत में दसवां अवतार ‘कल्कि’ आएगा। वह मानव जिस पर तुम काम कर रहे हो.. वह मानव, जो आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठतम होगा।”

“हिंदू दर्शन वास्तव में अर्थपूर्ण और पूर्णतः वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है!”

मित्रों.. वेद, पुराण, ग्रंथ, उपनिषद इत्यादि सब अर्थपूर्ण हैं। सिर्फ आपका देखने का दृष्टिकोण सही होना चाहिए, और उनका सही अर्थ बताने के लिए एक योग्य मार्गदर्शक जो कथाओं के मूल को आपके अन्तःस्थल में स्थापित कर सके।

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