हम भारत के मतदाता है - Voters of India

6 August, 2020
Voters of India

भारत में पूरी तरह से वोट बैंक कि राजनीती चलती है

भारत बहुत ही अनोखा देश है। यहाँ विभिन्न जाती और विभिन्न धर्म के लोग रहते है। जो हमेशा अपनी जाती और धर्म कि सीमाओं से बंधे रहते है। भारत के मतदाताओ को सबकुछ अपनी जाती का या धर्म का होना चाहिए क्योकि जाती या धर्म के नाम पर लोग आसानी से भरोसा कर लेते है कि अपनी जाती या अपने धर्म का व्यक्ति व्यवसाय कर रहा है या अपने जाती या धर्म का व्यक्ति नेता है तो हमारे साथ धोखा नहीं करेगा और उनको फायदा पहुचायेगा आरक्षण देगा ऐसा मान लेते है।

भारत के मतदाता अपने गाव हो या शहर या देश कि बात हो नेता अपने जाती का ही चुनते है। अपने जाती वाले या धर्म वाले नेता को वोट देते है फिर चाहे वह व्यक्ति कैसा भी हो इससे उनको कोई मतलब नहीं होता सिर्फ अपना फायदा देखते है। भारत के मतदाता अपनी जाती या धर्म समाज से उठकर देश के बारे में बहुत ही कम सोचते है।

जाती और धर्म तो सिर्फ शादी करते समय देखना चाहिए। भारत के मतदाता नेता तो ऐसे चुनते है अपनी जाती का देखकर जैसे कि नेता नहीं बल्कि अपने लिए जीजा या दामाद पसंद करते है। किसी धर्म के लोग तो फतवा भी निकल देते है कि हमें फायदा देने वाले नेता को ही वोट दे नहीं तो समाज से निष्काषित कर दिया जायेगा।

भारत के कई मतदाता तो अपने जाती वाले नेताओ को अपना भगवान मानने लगते है। यह सारा खेल सिर्फ लालच का है आरक्षण का है। भारत के मतदाताओ को यह समझ में नहीं आता है कि यह देश है तभी हम है। सबसे पहले देश है फिर धर्म फिर जाती के बारे में सोचना चाहिए। भारत के मतदाता इतने बिकाऊ है शराब कि एक बोतल के लिए भी बिक जाते है। तो कई मतदाता सिर्फ ५०० रूपये में बिक जाते है ऐसा हर बार चुनाव के समय देखने को मिलता रहता है।

कई लोग पैसे बाटते हुए और कई लोग पैसे लेते हुए देखे और पाए जाते है। कई लोग तो वोट का धंधा करते है कि मेरे पास इतने वोट है मुझे इतने पैसे दो तो इतना वोट दिलाऊंगा या कुछ और लालच देते है। भारत में पूरी तरह से वोट बैंक कि राजनीती चलती है। आरक्षण कि राजनीती चलती है। यहाँ तो मंत्री भी ख़रीदे और बेचे जाते है वो भी करोडो रूपये में।

जहा वोटर और मंत्री खरीदे और बेचे जाते है वहा देशहित कि बात कैसे कि जा सकती है यहाँ तो सर और सिर्फ व्यापार होता है। भारत में राजनीती एक व्यापार है और मतदाता ग्राहक है। जिसमे मतदाताओ को अपना नेता चुनने के बाद पांच साल कि गारंटी या वारंटी दी जाती है।

नेता वोट लेने के लिए चुनाव के समय मतदाता के आगे एक बार हाथ जोड़ता और चुनाव समाप्त होने के बाद मतदाता से पुरे पांच साल तक अपने आगे हाथ नेता के आगे जोडती है। यह सिलसिला चलता रहता है और नेताओ का व्यापार चलता रहता है नेता अपनी भरने में लीन रहते है। भारत के मतदाता हर बार कि तरह सिर्फ पछतावा ही करके रह जाते है।

- RAKESH PAL