निजीकरण से हजारों सरकारी नौकरियां भी खत्म हो जाएंगी

July 12, 2020
Privatisation of Government Sector

सरकारी नौकरियों का निजीकरण के नुकसान

ये सभी जानते है की गोवेर्मेंट सेक्टर का धीरे धीरे निजीकरण हो रहा हैं। सरकार की बड़ी से बड़ी कम्पनिया अब प्राइवेट हो चुकी है यानि सरकार ने उन्हें प्राइवेट कंपनी को बेच चुकी है चाहे वो Oil Company हो या Coal India हो, Air India का भी privatization की बात चल रही है बैंको का भी मर्जर हो चूका है, BSNL और MTNL ये भी कम्पनिया अब डूबने के कगार पर है सरकार उन्हें भी बेचना चाह रही हैं।

एक वक्त था जब सरकारी कंपनियों का ही बोल बाला था पर बाद में जो भी सरकार आयी धीरे धीरे सरकारी कंपनियों को प्राइवेट कंपनियों को बेचना सुरु कर दिया।

अब सवाल ये है की सरकारी नौकरियों का निजीकरण सही है या गलत। कुछ उपभोक्ताओ का कहना है की ये गलत है। सरकारी नौकरिया और सरकारी कंपनी होनी चाहिए क्यों की इनपर सरकार का नियंत्रण रहेगा। सरकारी कंपनियों के रहने से प्राइवेट कंपनियों की मनमानी लूट नहीं होती है जैसे आजकल प्राइवेट स्कूल मनमानी फीस और मनमानी नियम चलते है। कुछ उपभोक्ताओ का मत है निजीकरण होना चाहिए इस से उन्हें अच्छी सुविधा मिलेगी।

Corruption in government jobs in india

प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों की सैलरी और प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों की सैलरी में जमीन आसमान का फर्क होता है और उतना ही फर्क काम करने में भी होता है।

सबसे बड़ी बात यह है की एक बार जब government jobs मिल जाती है तो कुछ कर्मचारी कामचोरी और रिश्वतखोरी में लिप्त हो जाते है उन्हें तब किसी का डर हीं नहीं रह जाता है अपने मन के मालिक बन जाते है बिना रिश्वत लिए काम ही नहीं करते और उपभोक्ताओ से तो ढंग से बात भी नहीं करते है जब चाहा धुतकार देते हैं और घमंड तो ऐसा आ जाता है की अब ये ही भगवान बन गए है।

कोई भी सरकारी नौकरी पाने के लिए लाखों रुपये रिश्वत देते हैं, आरछण और कोटा का भी सहारा लेते हैं जिस भी रास्ते से हो बस किसी भी तरह से किसी भी डिपार्टमेंट में कोई भी पोस्ट मिल जाये ताकि जिंदगी आराम से बिना काम किये बीत जाये और पेंशन अलग से चाहिए। नौकरी मिलने के बाद इनमे कामचोर, रिश्वतखोरी, आलसपन भर जाता है. सैलरी बढ़ाने के लिए "हड़ताल' तक पे उतर आते हैं।

सरकारी नौकरी मिल जाने के बाद सरकार का फायदा हो या नुकसान इन्हे कोई फर्क नहीं पडता इन्हे सिर्फ अपनी सैलरी से मतलब होता है। यही बड़ी वजह है की गवर्नमेंट कंपनियों के डूबने में।

तो सवाल यही है की Government jobs का privatization सही या गलत ?

- RAKESH PAL