किराये का घर और दुकान: टैंशन और सिरदर्द ...

September 22, 2020
kiraye ka ghar aur dukaan

किराये पर रहें या अपना घर खरीदें?

शहरो में अधिकतर लोग अपनी जिन्दगी कि सुरुआत किराए के घर और दुकान से करते है क्योकि शहरो में अधिकतर लोग गाँव से जाकर बसे होते है। शहरो में उनका कूछ भी नहीं होता, अपने सपनो को पूरा करने के लिए शहर आते है और किराये के घर से या किराए कि दुकान से अपने जीवन कि सुरुआत करते है जिसमे उन्हें अनेक प्रकार कि परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

पहले तो उन्हें जल्दी किराए पर घर नहीं मिलता है और मिलता भी है तो बजट से जादा किराया होता है और बहुत मोलभाव करना पड़ता है। किराए का घर मिलते ही सबसे पहले उन्हें ब्रोकर को उसका कमीशन देना पड़ता है कही कही तो ब्रोकर कमीशन के रूप में दो महीने का किराया लेते है और हर ग्यारह महीने में फिर से उन्हें उनका कमीशन देना पड़ता है जो कि एक महीने का किराया होता है यदि नहीं दिया तो घर खाली करना पड़ता है और रहे तो एक महीने का किराया कमीशन के रूप में ब्रोकर को दो और दस प्रतिशत किराया भी बढ़ जाता है हर ग्यारह महीने पर। हर ग्यारह महीने पर घर बदलना भी पड़ता है यदि मकान मालिक नहीं रखता है तब घर का सब सामान लेकर हर ग्यारह महीने पर इस बिल्डिंग से उस बिल्डिंग में करना पड़ता है ये खर्चा भी अलग से बढ़ जाता है।

बिल्डिंग में किराए पर रहने वालो को कोई मान सम्मान भी नहीं देता भले ही किरायेदार कितना भी पैसा वाला क्यू न हो या कितनी भी बड़ी गाडी क्यू न हो उसके पास। यही व्यवहार किराए के दुकान वालो के साथ भी होता है हर जगह। पहले तो जल्दी सही स्थान पर दुकान नहीं मिलती और मिलती भी है तो अधिक भाडा देने के बाद फिर कई महीने तो वह दुकान जमाने में निकल जाता है तब तक ग्यारह महीने पुरे हो जाते है ब्रोकर भाडा लेने के लिए चक्कर लगाने लग जाता है दुकान का किराया भी बढ़ जाता है दस प्रतिशत। और अगर किसी तरह दुकान वहां जम जाती है तो दुकान मालिक को खटकने लग जाता है कि अरे यह तो मेरी दुकान से बहुत पैसा कमा रहा है तो दुकान मालिक भाड़ा बढ़ा देते है दुगुना भाडा मांगने लग जाते है या तो खुद ही दुकान चलाएंगे ऐसा बोलकर दुकान खाली करा देते है।

बाद में भले ही वह दुकान न चला पाए या दुकान साल भर खली पड़ी रहे वो मंजूर है लेकिन किसी को शांति से कमाने खाने नहीं देंगे। किरायेदार किस तरह अपना घर, दुकान और परिवार चला रहा है यह किसी को नहीं दिखता। बहुत ही कम लोग होते है जो किरायेदार को परेशान नहीं करते है उनको भी कमाने खाने का मौका देते है। वर्ना जनले वालो से तो पूरी दुनिया भरी पड़ी है।

- RAKESH PAL