अंधा प्यार । प्यार अंधा होता है?

अंधा प्यार: प्यार कितना अंधा होता है लड़कियां कितनी पागल होती है।

रिया महेन्द्र के प्यार में पूरी तरह से अंधी हो चुकी थी।

यह कहानी रिया कि है जो कि मुंबई में रहती है उसे भी एक लड़के से प्यार हो गया था जिसका नाम महेन्द्र है। रिया एक IT कंपनी में नौकरी करती थी यह रिया कि पहली नौकरी थी महेन्द्र भी उसी कंपनी में नौकरी करता था। धीरे धीरे रिया और महेन्द्र में दोस्ती हो गयी। दोनों रोज साथ में ऑफिस आने जाने लगे रोज, दोनों कि बाते भी ऑफिस के बाद में देर तक फोन पर होने लगी यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा और कुछ महीनो के बाद यह दोस्ती प्यार में बदल गयी।

फिर देर रात तक फोन पर बाते करना एक दुसरे से सबकुछ बताना साथ में घूमना फिरना यह सब बढ़ने लगा और रिया और महेन्द्र एक दुसरे के प्यार में डूबते चले गये और दोनों के बिच प्यार बहुत ही गहरा हो गया। और यह सब ऐसे ही चलता रहा रिया महेन्द्र के घर पर भी आने जाने लगी महेन्द्र अपने चार दोस्तों के साथ किराये के मकान में रहता था क्योकि महेन्द्र के माँ बाप दिल्ली में रहते थे यहाँ मुंबई में उसका कोई नहीं था।

इसलिए रिया को महेन्द्र के रूम में आने में कोई परेशानी नहीं होती थी और कई बार तो महेन्द्र और रिया देवेंन्द्र के रूम में घंटो पड़े रहते और रोमांस भी करते रहते थे। रिया इस कदर महेन्द्र के प्यार में डूब चुकी थी कि वो महेन्द्र के बिना एक दिन एक पल भी नहीं रह पाती थी इसलिए रिया हमेशा महेन्द्र के साथ ही रहने लगी थी। रिया महेन्द्र के प्यार में पूरी तरह से अंधी हो चुकी थी। एक बार रिया ने महेन्द्र के साथ मंदिर में जाकर शादी भी कर ली थी।

रिया के इस तरह महेन्द्र के साथ रहने कि वजह से महेन्द्र भी ठीक से काम नहीं कर पा रहा था उसे बार बार ऑफिस से छुट्टी लेनी पड़ती थी और रिया भी अपना काम छोड़कर दीनभर महेन्द्र के साथ उसके रूम में पड़ी रहती थी। जिससे उन्दोनो का भविष्य ख़राब हो रहा था।

रिया कि यह बात रिया के घरवालो को पता चल गयी और उन्होंने रिया कि नौकरी छुडवा दी और एक अच्छा सा लड़का देखकर रिया कि शादी करवा दी लेकिन वहा भी रिया का मन महेन्द्र के बिना नहीं लग रहा था वह छुप छुप कर महेन्द्र से मिलने महेन्द्र के रूम पर आ जाती थी जिसके कारण महेन्द्र भी तंग आ चूका था रिया से इसलिए महेन्द्र ने अपना रूम बदल दिया और दुसरे जगह पर रहने लगा।

लेकिन फिर भी किसी न किसी के जरिये से रिया महेन्द्र का पता ढूंड लेती थी और महेन्द्र से मिलने उसके रूम में पहुच जाती थी। जिससे परेशान होकर महेन्द्र ने कई रूम डबल डाले लेकिन रिया किसी भी तरीके से महेन्द्र को ढूंड ही लेती थी अंत में तंग होकर महेन्द्र में मुंबई शहर ही छोड़ दिया और दिल्ली चला गया और वही नौकरी करने लगा।

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